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बिन ब्याही मां बनी 13 वर्षीय मासूम लाली

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शिमला — लाली की दर्द भरी दास्तां में आंसुओं का मंजर टूट पड़ा है। खेलने-कूदने की उम्र में ऐसा तूफान आया, जिसने जिंदगी को झकझोर कर रख दिया है। मामा की हवस का शिकार हुई 13 वर्षीय लाली बिन ब्याही मां बनी है, जो केएनएच में जिंदगी और मौत के बीच लड़ रही है। आज जब अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस आयोजित किया जा रहा है, तो वहीं लाली अपने भविष्य की धुंधली तस्वीर देखकर करवटें बदल रही है। इस वाकया ने फिर से साबित किया है कि महिला न तो घर में ही महफूज है और न ही कार्यालय। एक तरफ समाज की यह सच्चाई और दूसरी ओर लाली की यह दर्द भरी दास्तां है। शिमला के रोहड़ू क्षेत्र की रहने वाली लाली (काल्पनिक नाम) मूल रूप से नेपाली है, लेकिन मामा ने उसकी मां न होने का फायदा उठाकर उसकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर दिया। जिंदगी और मौत के बीच लड़ते हुए शुक्रवार को उसने बेटे को जन्म दिया है। रोहड़ू के सरकारी स्कूल में लाली छठी कक्षा की छात्रा है। लाली की मां ने बच्चों को छोड़कर दूसरी शादी कर ली थी, जिससे बच्चों का भार पिता के सिर पर था, मामा भी साथ रहता था, जिसने मजबूरी में सहायता तो क्या की, लाली को ऐसे गर्क में धकेल दिया है। पिता को इस बारे में उस समय पता लगा, जब लाली को गर्भवती हुए सात माह का समय बीत चुका था। कम आयु में गर्भवती होने के कारण डाक्टर को लाली और उसके बच्चे की जान बचाने के लिए सिजेरियन करना पड़ा। 48 घंटे का समय बीत जाने के बाद लाली को होश आया है, लेकिन उसकी निगाहें उसी बच्चे पर टिकी हैं। लाली के परिजनों ने ‘दिव्य हिमाचल’ से बातचीत करते हुए कहा कि उसका मामा आज जेल में है। गरीब बाप लाली को पढ़ाना तो चाहता है, मगर उसे इस बात का भी इंतजार है कि कोई इस बच्चे के पालन-पोषण व जिम्मेदारी के लिए आगे तो आए। अब समाज की सीमाएं व मर्यादाएं इस बच्चे के भविष्य के लिए कितनी बाधा बनती हैं, यह तो समय ही बताएगा।

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