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बागवानों की आर्थिकी में रंग भरेगी अब कॉफी

कांगड़ा, विश्व मानचित्र पर पर्यटन और चाय की पैदावार के लिए विख्यात कांगड़ा घाटी का नाम शीघ्र ही ‘‘कॉफी नगरी‘‘ से विख्यात होगा। जिला के 25 से भी अधिक बागवान इस सपने को साकार करने के लिए कृषि विभाग के सहयोग से हिमाचल की तस्वीर को बदलने के लिए अपनी मेहनत और पसीने से रंग भरने की कवायद में जुटे हैं। इन्हीं बागवानों में शामिल हैं कांगड़ा के चैतडू गांव की 46 वर्षीय ललिता देवी तथा 67 वर्षीय उनके ज्येष्ठ सुरेन्द्र कुमार बागवान जो अपनी दो एकड़ भूमि पर पांच सौ से भी अधिक कॉफी के पौधों को उगाकर नई ईवारत रचने की तैयारी में है। यूॅ तो पांच भाईयों का यह कृषक -बागवान संयुक्त परिवार वर्षों से परम्परागत खेती करके अपना जीवन यापन कर रहा है। कृषि विभाग के प्रोत्साहन, परामर्श और कॉफी के व्यवसाय के उज्जवल भविष्य का इन पर इतना प्रभावी असर है कि वकालत की शिक्षा ग्रहण कर रहे इनके ज्येष्ठ पुत्र चंदन ने भी कॉफी के पौधों के रख-रखाव में रूचि लेना आरम्भ कर दिया है। यद्वपि प्रदेश में इस समय कांगड़ा जिला के अतिरिक्त मंडी में दो हैैक्टेयर भूमि पर 25 बागवान ऊना में एक हैक्टेयर भूमि पर 23 और बिलासपुर में तीन हैक्टेयर
भूमि पर 39 बागवान कॉफी की खेती से अपनी आर्थिकी को सुदृढ़ करने में परिश्रम कर रहे हैं। विशेषज्ञों का मत है कि हिमाचल की ढलानदार भूमि व जलवायु कॉफी की खेती के लिए अन्य पहाड़ी राज्यों की अपेक्षा अधिक उपयोगी है। ज्यादा से ज्यादा बागवानों का
रूझान इसके उत्पादन की ओर होने से यह न केवल उनकी आर्थिकी में आधारभूत वृद्वि ही करेगी अपितु प्रदेश का नाम उत्तम किस्म की कॉफी के उत्पादन करने वाले प्रदेश में भी शमिल हो जाएगा।

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