Header ad
Header ad
Header ad

बंदरों की समस्या के चलते डरवाड़ ग्राम के किसानों ने अपनाया फसले उगाने का वैकल्पिक रास्ता

मंडी, 12 सितम्बर (पुंछी):प्रदेश में आए दिन बन्दरो द्धारा किसानो के खेतो में घुसकर उनकी फसलो को तहस नहस करने से किसान लोग परेशान हो चुके है। बंदरों की बढ़ती समस्या के चलते बहुत सी पंचायतों में किसानों ने अपने खेत खाली छोड़ दिये हैं। जबकि सरकार अभी भी घिसे पीटे तौर तरीकों से इस समस्या का हल करने में लगी हुई हैं। परन्तु धर्मपुर विधान सभा क्षेत्र की डरवाड़ ग्राम पंचायत के किसानों ने इस समस्या के चलते वैकल्पिक रास्ता ढूंढकर ऐसी फसले उगाने का निर्णय लिया हैं जिन्हें बंदर नष्ट नहीं करते हैं। जिसमें हल्दी, अदरक, कचालू और जीमीकंद की फसल प्रमुख हैं।

बन्दरो के डर से 250 परिवारों ने नंही की अपनी जमीन में खेती
वर्ष 2012 में धर्मपुर विधान सभा क्षेत्र की पंचायत के डरवाड़ गांव में लगभग 250 परिवारों ने अपनी जमीन खाली छोड़ दी जहां वे कई वर्षो से मक्की और धान उगाते थे। इसी दौरान पंचायत में नाबार्ड के सहयोग से मंडी साक्षरता एवम् जन विकास समिति के संस्थापक सदस्य भूपेन्द्र सिंह ने ग्रामीणों के किसान क्लब गठित करने के लिए प्रेरित किया। जिसके चलते पंचायत के सभी 7 वार्डो में किसान क्लब गठित किये गये। जिन्हें बाद में एक समिति में संगठित किया गया। जिसका नाम ग्रामीण विकास समिति डरवाड़ रखा गया ओर उसे एस.डी.एम. सरकाघाट के कार्यालय में पंजीकृत किया गया। इन किसान क्लबों ने कृषि विभाग से इस वर्ष 20 क्विटंल हल्दी का बीज सस्ती दरों पर हासिल किया और उस जमीन पर उसे बीजा जिसे पिछले वर्ष खाली छोड़ दिया गया था। हल्दी की बिजाई करने वाले किसानों में अन्नत राम, मेहर सिंह, ओम प्रकाश, राजकुमार, सुखराम, कृष्णी देवी, ब्यास देव, चेतराम, बलवीर सिंह, नरेन्द्र कुमार, कुलदीप सकलानी, प्रेम सिंह, रूपलाल, सुशील कुमर सिंह, रूपलाल इत्यादि प्रमुख हैं। अब ये फसल उग चुकी हैं और बंदरों से भी बची हुई हैं। दूसरी प्रमुख फसल जीमीकंद है जिसका बीज किसानों ने बिलासपुर जिला के जुखाला के पास से राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त प्रगतिशील किसान श्याल लाल से प्राप्त किया । इस पर भी कृषि विभाग ने अनुदान देकर किसानों की मदद की। इसके अलावा, अदरक और कचालू की फसल भी बड़े स्तर पर किसानों ने उगाई हैं। ग्रामीण विकास समिति ने अब नाबार्ड को एक प्रस्ताव भेजा है जिसके माध्यम से वे पंचायत स्तर पर हल्दी उत्पादकों को संगठित करके उनके उत्पाद (हल्दी) की पिसाई, पैकिंग और मार्केटिंग के लिए एक लघु उद्योग वहां स्थापित करना चाहते हैं। जिसमें पंचायत में गठित महिला स्वयं सहायता समूहों की सदस्यों को रोजगार हासिल होगा। इसके अलावा पंचायत में पारंपरिक बीजों को इकठठा करके बीज संग्रहण केन्द्र खोलने का प्रयास किया जा रहा हैं। साथ ही कृषि विक्रय केन्द्र स्थापना बारे प्रस्ताव कृषि विभाग को समिति ने भेजा हैं। इस बारे नाबार्ड के जिला प्रबंधक एमपी शर्मा ने भी पंचायत में जाकर किसान क्लबों के सदस्यों से चर्चा करके इस कार्य को विस्तार देने और मार्केटिंग का ढांचा विकसित करने की जरूरत पर बल दिया ताकि जो पहल पंचायत में हुई है उसे सफल किया जा सके और किसानों की आय में वैकल्पिक खेती से वृद्घि हो सकें।

Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

 Click this button or press Ctrl+G to toggle between multilang and English

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *