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फैशन भी दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम देने में पीछे नहीं

images (4)तेजी से बदले दौर में सब कुछ तेजी से बदला है। अगर दुष्कर्म की बढ़ती घटनाओं की बात करे तो साफ दिखता है कि फैशन भी दुष्कर्म की घटनाओं को अंजाम देने में पीछे नहीं। बालीवुड से लेकर शहर के बाजारों, कार्यक्रमों में देखा जाए तो साफ दिखता है। आज कल काफी युवतियों के पहरावे में काफी बदलाव है। वैसे भी फैशन की अंधी दौडऩे भारतीय समाज के प्रत्येक वर्ग को लोगों को अपनी और आकर्षिक कर लिया है। देखा जाए तो सजने संवरने का प्रचलन तो कई दशकों से चल रहा है लेकिन इन दिनों फैशन के नाम पर नग्रनता की सीमा लगातार बढ़ रही है, जिस वजह से किसी के मन में भी खोट उत्पन हो सकता है। इसलिए सभी वर्ग के पुरुष व महिलीओं को फैशन की धज्जियां उड़ाती नग्नता पर रोक लगानी चाहिए। इसी से दुष्कर्म जैसे अपराध रोकने में मदद मिल सकती है। अब तो बच्चों पर भी फैशन के अलावा मोबालि फोनों का काफी प्रभाव दिखने लगा है। इस बाबत महिला रोग विशेषज्ञ डा. अनीता बांसल का कहना है कि वैसे तो बच्चों को पढ़ाई व खेलों में ही रूचि लेनी चाहिए लेकिन आज के बच्चे पढ़ाई से ज्यादा फैशन जैसी चीजों के दिवाने होने लगे है। अग्रवाल सभा फगवाड़ा पधान मुरली मनवोहर गुप्ता का कहना है कि सुंदर दिखने हेतु फैशन भी जरूरी है। मगर फैशन की आड़ में नग्नता से भारतीय सभ्यता निरंतर धूमित हो रहील है। ओंकार बस सॢवस के एम.डी. आनंद मोहन शारदा का कहना है कि पिछले कुछ सालों से दुष्कर्मों जैसे घिनौने अपराधों का ग्राफ तेजी से बढ़ा है। अगर इस पर गम्भीरता से सोच विचार किया जाए तो साफ दिखा है कि फैशन भी दुष्कर्म जैसी घटनाओं को अंजाम देने में पीछे  नहीं। करियाणा यूनियन के प्रधान सुदेश कलूचा का कहना है कि भारत में पश्चिमी सभ्यता का जादू निरंतर बढ़ता चला जा रहा है। फैशन व बढ़ती दुष्कर्म की घटनाओं के चलते भारत सरकार को अपने मापदंडों पर सख्ती लागू करनी चाहिए। मनजीत मोबाइल के मालिक मंजीत सिंह का कहना है कि देश में बढ़ते फैशन के कारण भी इंसान दुष्कर्म जैसे कताफी संगीन अपराधों को अंजाम दे बैठता है। जो कि भारत देश के लिए काफी चिंता का विषय है। गौरतलब है कि इन दिनों सर्दी पूरे यौवन पर है दूसरी तरफ शादियों व अन्य समारोह आदि में युवा वर्ग शारीरिक सुंदरता को दिखाने हेतु सर्दी की परवाह न करते हुए भी कम वस्त्रों को डाल कर आनंद ले रहा है। फैशन कता जुनून पुरुषों की अपेक्षा महिलाओं पर पूरी तरह हावी है। इसलिए सरकारों के अलावा देश की युवा पीढ़ी व बच्चों को फैशन के विषय पर सोच विचार कर मापदंड अपनाने होंगे ताकि दुष्कर्म की घटनाओं में कुछ हद तक कमी आ सके। 

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