Header ad
Header ad
Header ad

फूलों की खेती से संवरी किस्मत-परिवार भी हुआ खुशहाल’ ’ बन्दर भी दूर भागते हैं क्राइसैथिमम से’

अर्की उपमण्डल के गांव डुमैहर के कैलाश चन्द भार्गव गांव के दूसरे किसानों की

तरह पिछले कई सालों से बंदरों से परेशान थे। खेतों में महीनों मेहनत
करने के बाद उनके हाथ अनाज और दालों का कुछ ही भाग लग पाता था। हर बार
फसल को बन्दर उजाड़ देते थे। बन्दरों से दुखी होकर कैलाश चन्द ने मकई
बीजना तो बिल्कुल बन्द कर दिया। यह भी समस्या का समाधान नहीं था। खेत उजड़ने
लगे और परिवार को भी अच्छा नहीं लगा।

कैलाश चन्द ने कुछ नया करने का मन बनाया और वह डा. वाई एस परमार वाणिकी
एवं उद्यानिकी विश्वविद्यालय नौणी चले गये। वहां पर उन्होंने डा. एस.आर. धीमान
से मुलाकात की। डा. धीमान ने उन्हें फूलों की खेती करने की सलाह दी। फूल भी
क्राइसैथिमम जिससे बन्दर दूर भागते हैं। कैलाश को और क्या चाहिए था,
उन्होंने क्राइसैथिमम विशेषज्ञ से इस पौधे के बारे में विस्तार से जानकारी
हासिल की। चायल के महोग-बाग में पहले से ही क्राइसैथिमम फूलों का उत्पादन कर
रहे रणजीत सिंह तथा इस कार्य में लगे दूसरे किसानों से कैलाश चन्द ने सम्पर्क
बनाया और फूल की पैदावार की बारीकियां सीख ली।

कैलाश चन्द को बन्दरों से निजात तथा पानी की कमी के चलते वैकल्पिक फसल उगाने
का मंत्र मिल गया। उन्होंने घर के समीप खेतों में वैज्ञानिक विधि से
क्राइसैथिमम की खेती दो वर्ष पहले ही शुरू की। आज कैलाश चन्द को बन्दरों
की कोई चिंता नहीं है। उनकी आर्थिकी में तेजी से बदलाव आया है। पूरा
परिवार सम्पन्न हुआ है। उन्होंने पारम्परिक खेती मक्की, गन्दम, दालें उगाने से
हटकर बाजार की मांग के अनुरूप और जंगली जानवरों के नुकसान से कोसों दूर
इस फूल को स्वरोजगार के रूप में अपनाया।

कैलाश चन्द बताते है कि पानी की कमी और बन्दरों वाले भूक्षेत्रों के लिए
फूलों की खेती का क्राईसैथिमम बेहतर सूत्र है। इस फूल की पैदावार से किसान
प्रति वर्गमीटर में दो से अढाई हजार रूपये छटे महीने आय प्राप्त कर सकता है। 27
गुणा एक मीटर चैडे बैड में छ इंच के फासले के हिसाब से एक हजार क्राइसैथिमम
के पौधे रोपित हो जाते हैं। इस कार्य को यदि जनवरी या फरवरी में होने
वाली वर्षा के दौरान कर लिया जाये तो अलग से सिंचाई की जरूरत नहीं रहती। इन
पौधों में गर्मी और शुष्कता झेलने की ताकत होती है। इस फूल को जल्द तैयार
करने के लिए ब्लैक टाॅप भी किया जाता है।

भागर्व बताते हैं कि क्राइसैथिमम फूल साल में एक पौधे में आठ बार लगता है।
बाजार में औसतन एक फूल की कीमत 10 रूपये तक मिल जाती है। इस तरह खेत में
केवल एक बैड जो 27 गुणा एक वर्ग मीटर का हो, उसमें 8000 डण्डिया यानि 80 हजार
रूपये का फूल पैदा हो जाता है। यह फूल 15 अक्तूबर से 15 जनवरी के बीच तैयार
होता है।

कैलाश चन्द महज दो बीघा जमीन में क्राइसैथिमम की खेती कर रहे हैं जिससे
उन्हें हर साल लाखों की आमदन हो रही है, साथ ही उनके परिवार को भी
स्वरोजगार का साधन मिला है और घर-परिवार की सभी जरूरतें आसानी से पूरी
हो रही हैं। वह दूसरे किसानों को संदेश देना चाहते हैं कि बन्दरों से
छुटकारा पाने तथा स्वरोजगार के लिए फूल की खेती बेहतर विकल्प है और बाजार
में इसकी मांग बहुत अधिक है।

Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

 Click this button or press Ctrl+G to toggle between multilang and English

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *