Header ad
Header ad
Header ad

पैराग्लाइडिंग से बदली बीड-बिलिंग की तस्वीर

पालमपुर: धौलाधार पर्वत श्रंृखला के आंचल में स्थित बीड-बिलिंग घाटी, नैंसर्गिक सौंदर्य, सीढ़ीनुमा सुंदर चाय के बाग, पहाड़ी तथा तिब्बती संस्कृति की झलक, यहां पर्यटकों को ही अपनी ओर आकर्षित नहीं करती, बल्कि पैराग्लाइडिंग के लिए बेहतरीन ढ़लानों के कारण दुनिया भर के पैराग्लाइडर्स का पसंदीदा स्थान होने के चलते अंतराष्ट्रीय मानचित्र पर भी अपनी विशेष पहचान रखता है।
समुंद्र तल से लगभग 2290 मीटर की उंचाई पर स्थित बीलिंग की पहचान इजरायली पायलट ने की थी। वर्ष 1982 में हैंगग्लाइडिंग के रूप में आरंभ यह खेल समय के साथ-साथ पैराग्लाइडिंग में परिवर्तित हुआ। प्रदेश सरकार के सहयोग से छोटे स्तर पर होने वाली इस प्रतियोगिता को अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा प्राप्त हुआ। इस वर्ष अक्तूबर माह में पैराग्लाइडिंग प्री-बल्ड कप का आयोजन प्रदेश सरकार के तत्वाधान में बिलिंग पैराग्लाइडिंग संघ द्वारा किया जा रहा है। प्रतियोगिता में भारत सहित दुनिया भर के लगभग 400 पैराग्लाइडर्स पायलटों के भाग लेने की संभावना है। इसके अतिरिक्त दुनिया भर से पैराग्लाइडिंग के शौकीन पैराग्लाइडर्स भी लगभग तीन माह तक बीड-बिलिंग में फ्री फ्लाइंग एवं अभ्यास इत्यादि के लिए जुटेंगे।
पैराग्लाइडिंग के साथ-साथ बीड-बिलिंग में मूलभूत सुविधाओं के अतिरिक्त यहां के लोगों की आर्थिकी में भी काफी सुधार हुआ है। पैराग्लाइडिंग के आयोजन से इस क्षेत्र की तस्वीर के साथ-साथ लोगों की तकदीर भी बदली है। मनोरम पर्यटक स्थल तथा अंतराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के आयोजन होने से यहां असंख्य पर्यटक तथा पैराग्लाइडर्स के आने से पर्यटन व्यवसाय में लगे लोगों को फाफी फायदा हो रहा है। बीड़ एवं आस-पास के क्षेत्र के सैंकडों लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के अवसर प्राप्त हुए। इस क्षेत्र के ज्योति ठाकुर, अरविंद, प्रकाश, मंजीत, कमल, सुरेश जैसे होनहार पैराग्लाइडर्स ने चीन, नेपाल, बुलगारिया, जापान इत्यादि देशों में भारत का प्रतिनिधित्व कर प्रदेश का नाम रोशन किया है।
बीड-बिलिंग के युवाओं के अतिरिक्त यहां की युवतियां भी कई बार मानव परिंदों के रूप में धौलाधार की पहाडि़यों को नाप चुकी हैं। पैराग्लाइडिंग से जहां इस क्षेत्र को अंतराष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली, वहीं क्षेत्र का विकास होने के साथ युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्राप्त हुए हैं। बीड़-बिलिंग क्षेत्र के लगभग 40 युवाओं ने पैराग्लाइडिंग को मुख्य व्यवसाय के रूप में अपनाकर औसतन 10 से 15 हजार रूपये प्रतिमाह कमा रहे हैं। आज इस क्षेत्र के कई युवा पर्यटकों को पैराग्लाइडि़ंग सीखाने के अतिरिक्त टैंडम फ्लाइंग के माहिर होने के चलते अच्छी खासी कमाई कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त कई युवाओं ने टैक्सी, होटल, रेस्टोरेंट, ढ़ाबा, दुकानों तथा ट्रैकिंग गाईड इत्यादि कई प्रकार के व्यवसाय आरंभ किए हैं। धौलाधार की पहाडि़यों पर स्थित बिलिंग दुनिया भर में सबसे लंबी उड़ान क्षेत्र के लिए दक्षिण अफ्रीका की काली घाटी के बाद दूसरे स्थान पर आती है। धौलाधार पर्वत श्रृंखला के साथ-साथ पूरे उड़ान क्षेत्र में किसी भी आपात स्थिति में लैडिंग के लिए स्थान उपलब्ध है। इसके अलावा प्रदेश सरकार ने लैंडिंग सुविधा के लिए समुंद्र तल से लगभग 1400 मीटर की उंचाई पर बीड़ में 68 कनाल भूमि का अधिग्रहण किया है। बीड़-बिलिंग घाटी में पैराग्लाडिंग के लिए सितंबर से नवंबर माह तक समय सबसे अनुकूल है। इन्हीं महिनों में दुनिया भर से फ्री फ्लायरांे के अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जा रहा है। लंबी उड़ान क्षेत्र होनें के चलते सबसे लंबी 249 किलोमीटर फ्लाइंग का विश्व रिर्कोड़ भी बिलिंग क्षेत्र में ही दर्ज किया गया है।
इस वर्ष 24 से 30 अक्तूबर 2013 तक बीड-बिलिंग घाटी में प्रदेश सरकार के सहयोग से पैराग्लाइडिंग प्री-बल्ड कप का आयोजन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार की ओर से प्रतियोगिता दौरान तमाम तरह की मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाई जा रही हैं, ताकि पैराग्लाइडिंग प्रतियोगिता का सफल आयोजन के साथ-साथ इस खेल की ओर लोगों को प्रेरित किया जा सके। सरकार खेलों के उत्थान तथा इनके विस्तार पर इस वर्ष 24 करोड़ रूपये व्यय कर रही है। इसके अतिरिक्त प्रदेश में साहासिक खेलों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास किये जा रहे हैं।

Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

 Click this button or press Ctrl+G to toggle between multilang and English

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *