October 20, 2017

पहली शादी छुपायी, तो दूसरी पत्नी वैध : कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि पहली शादी अस्तित्व में होने का तथ्य छिपा कर दूसरी बार शादी करना गैरकानूनी है, लेकिन दूसरी पत्नी को ‘कानूनी रूप से विवाहित पत्नी’ माना जायेगा और वह अपने व इस दांपत्य जीवन से होनेवाले बच्चों के लिए हिंदू विवाह कानून के तहत पति से गुजारा भत्ते की हकदार है. न्यायमूर्ति रंजना प्रकाश देसाई और न्यायमूर्ति एके सीकरी के खंडपीठ ने कहा किपत्नी को गुजारा भत्ता देने से इनकार करने संबंधी शीर्ष अदालत का पहले का निर्णय उन मामलों में लागू नहीं होगा, जहां व्यक्ति ने पहले विवाह के बारे में महिला को अंधेरे में रखते हुए दूसरी बार शादी की हो. न्यायाधीशों ने कहा कि यदि यह व्याख्या स्वीकार नहीं की गयी, तो यह पत्नी से छल करने का पति को लाभ देना होगा. इसलिए दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 125 के तहत कम-से-कम गुजारा भत्ते का दावा करने के लिए ऐसी महिला को कानूनी ब्याहता पत्नी मानना होगा. न्यायालय ने इस मामले में बंबई हाइकोर्ट के निर्णय के खिलाफ व्यक्ति की अपील खारिज करते हुए यह व्यवस्था दी. हाइकोर्ट ने इस व्यक्ति को दूसरी पत्नी को गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया था, क्योंकि उसने पहली शादी के अस्तित्व में होने की बात छुपायी थी. न्यायाधीशों ने कहा कि उनकी राय में आधव और सविताबेन के मामले में शीर्ष अदालत का निर्णय सिर्फ उन्हीं परिस्थितियों में लागू होगा, जहां महिला पहली शादी के अस्तित्व में होने की जानकारी के बावजूद ऐसे व्यक्ति से शादी करती है. ऐसे मामलों में उसे यह जानना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति से दूसरी शादी की अनुमति नहीं है और हिंदू विवाह कानून के तहत ऐसा करना निषेध है. इसलिए उसे इसके परिणाम भुगतने होंगे. न्यायालय ने कहा कि यह निर्णय उन मामलों में लागू नहीं होगा, जहां एक व्यक्ति पहले विवाह के अस्तित्व में होने के तथ्य के बारे में महिला को अंधेरे में रखते हुए दूसरी बार शादी करता है.

About The Author

Related posts

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *