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पचास फीसदी गत्ता उद्योग पेपर न मिलने पर हुए बंद

बद्दी(रिंकु राणा), 20 मार्च – यूपी व उत्तराखंड की पेपर मिलों का असर बीबीएन के गत्ता
उद्योगों पर दिखना शुरू हो गया है। बीबीएन के 50 फीसदी उद्योग गत्ते के अभाव में बंद हो गए है। जबकि 50 फीसदी उद्योगों में कच्चा माल न मिलने पर 20 फीसदी ही कार्य हो रहा है। अगर एक- दो दिन के भीतर कच्चा माल नहीं मिला तो इन पचास फीसदी उद्योगों में भी काम बंद हो सकता है। एक माह के भीतर यूपी व उत्तराखंड की पेपर मिलों की रेट बढ़ाने के लिए दूसरी बार हड़ताल कर दी है। पहले पेपर मिलों ने तीन रुपये पेपर के दाम बढ़ा दिए है। लेकिन गत्ते से तैयार होने वाले उत्पाद को बाजार से बढ़े हुए दाम नहीं मिल रहे है। ऐसे में पेपर के और दाम बढ़ जाते है तो अधिकांश गत्ता संचालक अपना बोरिया बिस्तर बंद करके यहां से पलायन कर सकतें है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष मुकेश जैन , प्रदेश महासचिव अजय चौधरी, बी.बी.एन. अध्यक्ष सुरेंद्र जैन ने कहा कि पेपर मिलों की मनमानी की चलते हर बार ऐसा हो रहा है। अपनी मनमानी के चलते सभी पेपर
मिल के संचालक एकजुट हो कर अपनी मिले बंद कर देते है। इस फर्जी हड़ताल से अपने रेट बढ़ाने में कामयाब हो जाते है। लेकिन ऐसा हर बार नही चलेगा। प्रदेश में 250 गत्ता उद्योग है जिसमें 50 हजार टन पेपर हर माल लगता है। प्रदेश में आधा दर्जन पेपर मिले है जो इस खपत का मात्र 20 फीसदी मांग को ही पूरा करती है। इसलिए गत्ता संचलकों को उत्तराखंड व यूपी की मिलों पर आधारित रहना पड़ता है। उपरोक्त लोगों का कहना है कि दो दिन होली के चलते उद्योग बंद रहे। अब 50 फीसदी गत्ता उद्योग तो चालू कर दिए
है लेकिन कच्चा माल न आने से उत्पादन न के बराबर है। गत्ता संचालकों के पास आर्डर तो है लेकिन जिस हिसाब से पेपर के दाम बढ़े है उसी हिसाब से मार्केट में उन्हें रेट देने के तैयार नहीं है।

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