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पंजाब में बस किराया घटा, हिमाचल को इंतजार

शिमला — अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल कीमतों में लगातार कटौती के चलते पंजाब ने जनहित के मद्देनजर बस किराए में चार फीसदी कटौती कर लोगों को राहत दी है। यानी प्रति किलोमीटर की दर से वहां सात पैसे की कटौती की गई है। हिमाचल में भी तेल की कीमतें अन्य राज्यों की तरह एचआरटीसी को फायदा पहुंचा रही हैं। एचआरटीसी सालाना 17 करोड़ रुपए का इससे अतिरिक्त धन बटोर रही है। मोदी सरकार के अब तक के कार्यकाल में पांच बार तेल कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में लुढ़क चुकी हैं। इसका सीधा लाभ देश के विभिन्न राज्यों को हुआ है। बावजूद इसके हिमाचल का परिवहन निगम अभी तक बस किराए में कटौती के लिए मंथन ही कर रहा है। पड़ोसी राज्यों ने समय की नजाकत समझते हुए अपने लोगों में चर्चाओं के अनुरूप बस किराए में कटौती कर दी है, मगर प्रदेश के बस निगम को अभी तक भी ऐसी फुर्सत ही नहीं मिल सकी है कि लोकहित में फैसला ले सके। यह उस निगम की हालत है, जिसे राज्य सरकार सालाना 120 करोड़ की वित्तीय सहायता सामाजिक क्षेत्र में निर्वहन के चलते प्रदान कर रही है। निगम का भले ही कुल घाटा 600 करोड़ से ज्यादा हो, मगर परिवहन मंत्री कई मर्तबा मीडिया में कह चुके हैं कि उनकी सक्रियता से निगम के राजस्व में बढ़ोतरी हो रही है। डिपोे के टारगेट फिक्स किए जाने के कारण कमाई बढ़ी है। भले ही तनख्वाह पर निगम कुल आय का 70 से 75 फीसदी खर्च करता हो, मगर हैरानी इस बात की है कि लगातार गिरते डीजल के दामों के बावजूद लोगों को निगम राहत नहीं दे पा रहा है। उल्लेखनीय रहेगा कि परिवहन मंत्री जीएस बाली ने कुछ समय पहले ही यह ऐलान किया था कि डीजल की कीमतों में यदि फिर कटौती होगी, तो बस किराए में प्रति किलोमीटर की दर से कटौती के बारे में गंभीरता से विचार किया जाएगा, मगर यह सिरे कब तक चढ़ेगा, इसका प्रदेश के लोगों को इंतजार है। चूंकि 90 फीसदी लोग निगम व निजी क्षेत्र की बसों में ही आवाजाही करते हैं।

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