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निगम के गले की फांस बना ग्रीन कार्ड

बिलासपुर — प्रदेश में यात्रियों को सस्ते सफर की सुविधा देने के मकसद से शुरू की गई ग्रीन कार्ड योजना खुद एचआरटीसी प्रबंधन के लिए ही गले की फांस बन गई है। हालात ये हैं कि हैडक्वार्टर फिक्स न होने के चलते एक ही रूट पर यात्री डबल-ट्रिप्पल फायदा उठाकर ग्रीन कार्ड का दुरुपयोग भी कर रहे हैं। ऐसे में यह योजना निगम के लिए घाटे का सौदा साबित होने लगी है। दूसरी ओर, कंडक्टर यूनियन ने निगम प्रबंधन से ग्रीन कार्ड योजना के तहत हैडक्वार्टर फिक्स किए जाने की वकालत की है। कंडक्टर यूनियन के प्रदेश महासचिव सोहन लाल का कहना है कि प्रदेश भर से कंडक्टरों ने शिकायत दी है कि यात्री ग्रीनकार्ड का जमकर दुरुपयोग कर रहे हैं, क्योंकि इसका हैडक्वार्टर ही फिक्स नहीं किया गया है। इस योजना के तहत यात्रियों को 40 से 60 किलोमीटर तक सफर करने पर तीस फीसदी छूट दिए जाने का प्रावधान है। ऐसे में मात्र पचास रुपए में ग्रीन कार्ड बनवाकर यात्री लंबे रूटों पर जाने के लिए इसका जमकर फायदा उठा रहे हैं, जिससे निगम को चूना लग रहा है। सोहन लाल के अनुसार हालांकि यलो कार्ड पर बीस फीसदी तक छूट दी गई है, लेकिन इसका हैडक्वार्टर फिक्स किया गया है। इसी तरह स्मार्ट कार्ड योजना के तहत दस फीसदी छूट दी गई है, जो कि यात्रियों के लिए फायदेमंद है। कंडक्टर भी इस योजना बाबत कोई ताजा आदेश न होने की वजह से यात्रियों को संतुष्ट नहीं कर सकते हैं। इस तरह की शिकायतें प्रदेश भर से कंडक्टर यूनियन के पास आ रही हैं जिस पर यूनियन ने निगम प्रबंधन से जल्द ही इस योजना के तहत हैडक्वार्टर फिक्स कर समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई है।

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