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नशीली दवाओं का नशा :-

download(धर्मशाला, रिया गुलेरिया )

मादक चीजों में आजकल नशीली दवाओं का नशा सभी प्रकार के लोगों में बढ़ता चला जा रहा है। नशीली दवाओं की बढ़ती लत पूरी पीढ़ी को समाप्त कर रही है। यह स्थिति आने वाली पीढ़ी के सामाजिक और वैयक्तिक स्वास्थ्य के लिए बडी गंभीर चुनौती है। नई पीढ़ी नशीली दवाओं की ओर बड़ी तेजी से आकर्षित हो रही है। एक पूरी पीढी नशे के गर्त में डूब रही है। आइये, इसकी पड़ताल करें। मादक द्रव्यों का प्रयोग एवं नशे की बढ़ती लत आजकल गंभीर चिन्ता का विषय है। आज की यह स्थिति आने वाली पीढ़ी के लिए सामाजिक व्यवस्था में साम्य, और सामाजिक एवं वैयक्तिक स्वास्थ्य के लिये प्रश्नवाचक बन जायेगी। प्राचीन भारत में सोमरस का प्रयोग किया जाता था। जो ऋिषिमुनि युगदृष्टा होते थे उनके द्वारा इष्ट सिद्धि के क्रम में व्यवधान न हो, इस उद्देश्य से चित्तवृत्ति निरोध के लिये सोमपान प्रचलित रहा। मध्य युग में स्वस्थ जीवन के लिये मादक द्रव्यों का सेवन किया जाता था। उन्हें सामाजिक आवश्यकता समझा जाता था। प्रायः उच्च अभिजात्य वर्ग इनका उपयोग अधिक करते थे। प्रारंभ से ही हमारे समाज में वर्ण व्यवस्था के अनुसार ही विभिन्न वर्णों के रीति रिवाज, आहार, व्यवहार, वस्त्राभूषण तथा व्यवसायादि निर्धारित रहे है। आज भी मादक द्रव्यों के प्रयोग का संबंध, धर्म, जाति, क्षेत्र, अथवा वर्ग समूह में देखने को मिलता है। कुछ वर्णों में मद्यपान परम्परा रही है। किन्तु आज के युग मे मद्यपान पर उनका आधिपत्य नहीं रहा है। अब तो कुछ वर्ण, धर्म अथवा जाति विशेष, समय-समय पर इन मादक द्रव्यों का प्रयोग समूह में अथवा व्यक्तिशः करते हैं। यथा होली-दीपावली के अवसर पर भांग, गांजा आदि सामान्यतया व्यवहृत होते हैं। आतिथ्य स्वरूप भी इनका व्यवहार विवाह जन्मोत्सवादि अन्य सामाजिक एवं पारिवारिक उत्सवों पर वर्ग विशेष में अभिजात्य वर्ग में सम्पन्नता के कारण मादक द्रव्य प्रायः प्रयुक्त होते हैं। ग्रामीण श्रमिक वर्ग भी इससे अछूता नहीं रहा है। शहरी जीवन में सामाजिक नियंत्रण एवं सामुदायिकता का अभाव होने से घर से बाहर, व्यक्ति मादक द्रव्यों के सेवन के लिये मुक्त रहता है। मध्य वर्ग के लोग प्रायः धूम्रपान करते हैं। यदा कदा मद्यपान भी। उच्च, मध्यवर्ग और उच्च अभिजात्य वर्ग मद्यपान करते हैं।

 

कोकीन :-

 

कोकीन प्रकृति से प्राप्त पदार्थ है, जिसका निष्कर्ष साउथ अफ्रीका में पायी जाने वाली रिर्योंजाइलिन कोक की पत्तियां से किया जाता है। 1960 में जर्मनी के एलबर्ट नेइमन ने कोक की पत्तियों से इसे पहली बार बनाया। इसे एक उत्तेजक पदार्थ के रूप में प्रयुक्त किया गया। नाक से सूंघते ही दिल की धड़कन तथा रक्तचाप बढ़ जाता है। इसके लगातार प्रयोग से सिर दर्द व सर्दी हो जाती है। अधिक प्रयोग करने पर यह महसूस होता है कि प्रयोगकर्ता की खाल के नीचे कीड़े रेंग रहे हैं।

 

नशे की लत पड़ने के लक्षण :-

 

ऽ खेलकूद और रोजमर्रा के कार्यों में दिलचस्पी न रहना।

 

ऽ भूख व वजन में कमी।

 

ऽ लड़खड़ाकर चलना। बेढ़गें तरीके से उठना-बैठना। कंपकपी होना।

 

ऽ आंखों में लालिमा ओर सूजन, ठीक से न दिखाई देना।

 

ऽ अस्पष्ट उच्चारण।

 

ऽ कपड़ों में खून के धब्बे ओर शरीर में कई ताजे इंजेक्शन के निशान मिलना।

 

ऽ चक्कर और उल्टी आना तथा शरीर में दर्द रहना।

 

ऽ नींद न आना या उनींदा रहना, सुस्ती और आलस्य।

 

ऽ गहरी चिंता, निराशा, और बहुत ज्यादा पसीना आना।

 

ऽ भावात्मक अलगाव और स्वभाव में अंतर आना।

 

ऽ याददाश्त और एकाग्रता में कमी।

 

नशों से बचाव :-

 

ऽ दृढ़ इच्छा शक्ति से किसी भी नशे से बचा जा सकता है। यह कठिन अवश्य हैं मगर असंभव नहीं है। यदि नशे के आदी व्यक्ति को उचित सहारा और मार्ग दर्शन मिले तो वह नशे को छोड़कर सामान्य जीवन जी सकता है।

 

ऽ बुरी संगति तथा मित्रों से बचें। यदि व्यक्ति अपने नशे के साथियों से अलग हो जाये तो धीरे धीरे वह नशीली चीजों से भी बच सकता हैं।

 

ऽ व्यक्ति को नये संगी, साथी, मित्र तथा ऐसी रूचियों का विकास करना चाहिए जो जीवन को सुधारने में कदद करे। उसे व्यायाम, खेलकूद, सभा, सम्मेलनों में भाग लेना चाहिए।

 

ऽ व्यक्ति को डाक्टरों की देखरेख में इलाज कराना चाहिए।

 

ऽ मनोवैज्ञानिक कारणों को दूर करना चाहिए। आवश्यक हो तो उसे मनोचिकित्सक को दिखाये।

 

ऽ व्यक्ति के संबंधियों, मित्रों व परिवार वालों को भी सहयोग करके व्यक्ति को नशे से बचाना चाहिए। ऐसे व्यक्ति को दया नहीं सहानुभूति चाहिए।

 

ऽ व्यक्ति को समाज, राष्ट्र, और स्वयं के हित का चिन्तन करना चाहिए।

 

ऽ देश में नशों की आदतें छुड़ाने वाली संस्थाएं है, उनका सहयोग लिया जाना चाहिए।

 

ऽ नशे से ग्रस्त व्यक्ति को सहानुभूति तथा सद्भावना से प्रेरित करें।

 

ऽ व्यक्ति को नशे से होने वाली हानियों से नियमित अवगत करावें।

 

ऽ नशा व स्वास्थ्य पर प्रकाशित साहित्य को अधिक से अधिक लोगों तक पहुचाया जाना चाहिए।

 

ऽ सरकार को नशीली दवाओं, सिगरेट, बीड़ी व शराब पर रोक लगानी चाहिए।

 

ऽ इन चीजों के विज्ञापनों पर रोक लगायी जानी चाहिए।

 

मादक पदार्थों की लत की रोकथाम और आप :-

 

ऽ अपने बच्चों से खुलकर बातें करें। उनकी बातें धैर्य से सुनें।

 

ऽ अपने बच्चों की गतिविधियों और उनके दोस्तों में दिलचस्पी लें।

 

ऽ बच्चों की समस्याओं के बारें घर में मिलबैठ कर बातचीत करें। उन्हें इनको सुलझाने के तरीकों के बारे में बताएं।

 

ऽ आप स्वयं शराब या नशीले पदार्थ का सेवन न करें। इस तरह बच्चों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करें।

 

ऽ घर में इस्तेमाल की जाने वाली दवाओं की पूरी जानकारी रखें।

 

ऽ नशीले पदार्थों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करें और इनके दुरूपयोग के बारे में भी सावधान रहें।

 

अध्यापक के रूप में :-

 

ऽ छात्रों से अनौपचारिक रूप में खुलकर बातें करें। उनकी बातें धैर्य से सुनें।

 

ऽ डन्हें नशीली दवाओं के दुरूपयोग के खतरों के बारे में बताएं।

 

ऽ अपने छात्रों की रूचियों और गतिविधियों में दिलचस्पी लें।

 

ऽ उन्हें नशीली दवाओं के दुरूपयोग की किसी भी घटना के बारे में सूचनाएं देने के लिए प्रेरित करें।

 

ऽ किशोरावस्था की समस्याओं के बारे में बातचीत करें अपने छात्रों को ऐसी समस्याओं को सुलझाने के बारे में बताएं।

 

ऽ उन्हें व्यवसाय का चुनाव करने और अपना लक्ष्य निर्धारित करने में मदद करें।

 

ऽ नशीली दवाओं के बारें में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करें और इनके दुरूपयोग के बारे में भी सावधान रहें।

 

नागरिक के रूप में :-

 

ऽ नशीली दवाओं को रखने, लाने, ले जाने को अगर कोई व्यक्ति आपसे कहे तो ऐसे अनुरोध से सावधान रहें।

 

ऽ अगर आपको पोस्त या भांग के पौधों, फसल की जानकारी हो तो कानून लागू करने वाले अपने नजदीकी के अधिकारी को इस बारें में बता दें।

 

ऽ अगर अपको किसी तरह का संदेह हो तो पुलिस को अवश्य सूचित कर दें चाहें यह सूचना गुमनाम रहकर ही दें।

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