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नरेंद्र मोदी को भाजपा का पीएम प्रत्याशी बनाये जाने पर बोले बिहार के मुख्यमंत्री :रवि

अपने वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के विरोध के बावजूद भाजपा ने प्रधानमंत्री पद के लिए नरेंद्र मोदी के नाम का एलान तो कर दिया, लेकिन उनकी खामोशी से सहमी है. डर है कि कोई ऐसा कदम न उठा लें, जो पार्टी की सेहत के लिए बेहतर न हो. यही वजह है कि शनिवार को भी पार्टी नेता उनके मान-मनौव्वल में जुटे रहे. उधर, आडवाणी से मुलाकात के बाद पार्टी नेता सुषमा स्वराज ने दावा किया है कि मोदी की उम्मीदवारी से आडवाणी जी नाराज नहीं हैं. अनंत कुमार, मुरलीधर राव व बलबीर पुंज सहित पार्टी के कई वरिष्ठ नेता भी आडवाणी से मिले.

विनाश काले विपरीत बुद्धि.’ गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी को भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किये जाने के दूसरे दिन शनिवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पहली प्रतिक्रिया यही थी. नरेंद्र मोदी को पीएम उम्मीदवार घोषित किये जाने के बाद पहली बार मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खुल कर बोले. आम तौर पर नरेंद्र मोदी पर होने वाले सवालों पर वे कोई जवाब देने से परहेज करते रहे हैं. रवींद्र भवन में जदयू के स्वास्थ्य समागम के बाद मीडियाकर्मियों से बातचीत में उन्होंने कहा कि यह कोई आश्चुर्यजनक फैसला नहीं था. तीन महीने पहले ही भांप लिया था. इसलिए उचित समय पर फैसला ले लिया. आज वही हो रहा है, जिसका पूर्वानुमान था. एनडीए में रहने के दौरान भाजपा को जदयू की नीतियों के बारे में बता दिया था. बावजूद इसके भाजपा ने ऐसे काम किये, जो जदयू की नीतियों से अलग थे. महंगाई, बेरोजगारी व भ्रष्टाचार के मुद्दे पर विपक्षी एकता गोलबंद हो रही थी.

भाजपा ने जान-बूझ कर ऐसे निर्णय लिये, जिसने विपक्षी एकता को समाप्त कर दिया. सब कुछ भांपने के बाद ही अलग होने का निर्णय लिया था. एक माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है. हवा बांधने की कोशिश है, जो सफल नहीं होगी. देश की जनता कभी भी विभाजनकारी नीतियों या नेता को स्वीकार नहीं करेगी. वहीं श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में आयोजित पूर्व राष्ट्रपति बीबी गिरि के जयंती समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वाासघात हमने नहीं, भाजपा ने किया है. वे कहते नहीं थे, पर भीतर से पूरी तैयारी थी. हमने तो अपना राय से अवगत करा दिया था. अगर हम अलग होने में देर करते, तो मूर्ख बनते. इसलिए सही समय पर फैसला ले लिया. हम जो कहते है, वही करते हैं. जो नहीं हो सकता, उसे कहते ही नहीं हैं. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने राजधर्म का पालन किया था. कई दलों को लेकर साथ चलने का तरीका उन्होंने पेश किया था. हमने समाज को कभी तोड.ने का काम नहीं किया. सबों को साथ लेकर चलते हैं.

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