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देवसदन में क्षेत्रीय साहित्यिक गोष्ठी

कुल्लू, 8 सितम्बर :हिमाचल कला संस्कृति भाषा अकादमी द्वारा आज देवसदन कुल्लू में क्षेत्रीय लेखक एवं कवि गोष्ठी का आयोजन किया गया। निदेशक भाषा एवं संस्कृति देवेन्द्र गुप्ता ने दीप प्रज्ज्वलित कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया।
साहित्यिक गोष्ठी के प्रथम सत्र में दो शोध-पत्र पढ़े गए, जिसमें हिंदी कहानी के सरोकार एवं हिमाचल के कथाकार विषय पर डा. निरंजन देव शर्मा ने प्रस्तुत किया। इस शोध-पत्र पर चर्चा करते हुए वरिष्ठ कहानीकार डा. सुंदर लोहिया ने कहा कि कहानी में विचार का होना आवश्यक है तभी वह कालजयी बनती है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी के कहानीकार को शोधार्थी बनना पड़ेगा। इसके अलावा वरिष्ठ कहानीकार योगेश्वर शर्मा, जयदेव विद्रोही, मुरारी शर्मा, दयानंद गौतम, कुलदीप चन्देल तथा हंसराज भारती ने भी कहानी चर्चा में भाग लिया। इसके बाद श्रीनिवास जोशी ने हिमाचल में लोक नाट्य लेखन परम्परा विषय पर अपना पत्र प्रस्तुत किया।
इस सत्र की अध्यक्षता प्रदेश के वरिष्ठ विद्वान मौलू राम ठाकुर ने की। उन्होंने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा कि दोनों पत्र वाचकों ने विषयानुरूप अपने आलेख प्रस्तुत किये हैं। उन्होंने कहा कि हिमाचल में लोक-नाट्य परम्परा बहुत पुरानी है। लोक-नाट्यों का लेखन संभव नहीं है परन्तु इनका प्रलेखन संभव हो सकता है तथा इनका संबंधित विभागों को यह कार्य करना चाहिए।
निदेशक भाषा संस्कृति एवं सचिव अकादमी डा. देवेन्द्र गुप्ता ने कहा कि इस क्षेत्रीय संगोष्ठी में मण्डी, बिलासपुर, कुल्लू और लाहुल-स्पिति के साहित्यकारों व कवियों को आमंत्रित किया गया है। पूरे प्रदेश में इस तरह की साहित्यिक गतिविधियां होती रहे, इसलिए चार-चार जिला को इक_ा कर किसी एक स्थान पर क्षेत्रीय साहित्यिक और कवि गोष्ठियों का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश व प्रदेश से बाहर के विद्वानों में विचार-विमर्श, साहित्यिक आदान-प्रदान के आयोजन होते रहे हैं और भविष्य में भी इस तरह की क्षेत्रीय और प्रदेश स्तर की साहित्यिक संगोष्ठियां और कवि-सम्मेलन होते रहेंगे। डा. गुप्ता ने आगे कहा कि लुप्त हो रहे लोक-नाट्यों के संरक्षण के लिए शीघ्र ही प्रभावी कदम उठाए जाएंगे।
द्वीतिय सत्र में दोपहर बाद कवि गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसकी अध्यक्षता श्रीनिवस जोशी ने की। इस कवि गोष्ठी में सर्वश्री हुकम ठाकुर, अजय, रामलाल पाठक, संदेश शर्मा, सुमन सिक्का, गणेश गऩी, जयदेव विद्रोही, सतीश चंद्र कौड़ा और किशन श्रीमान ने अपनी नयी कविता का पाठ किया। सरला चम्बयाल और वीना जम्वाल के लोकगीतों से सम्मेलन का अंत हुआ।

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