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तूफान से मक्की की फसल तबाह

चंबाः विकास खंड सलूणी की सिंयुला, लिग्गा, खरल, द्रेकड़ी, सांलवा, मौड़ा, बाड़का, भजोत्रा, सरेरी व मांझली आदि पंचायतों में रविवार को आए तूफान से मक्की की फसल को काफी नुक्सान पहुंचा है। तूफान ने किसानों की साल भर की मेहनत पर पानी फेर दिया है। किसानों में जर्म सिंह, चतर सिंह, बलदेव, चनालू राम, शक्ति प्रसाद, सुरेश कुमार, मान सिंह, चमन लाल, रोशन लाल व निहाल सिंह आदि का कहना है कि उनकी फसल हर साल कुदरत के कहर का शिकार हो जाती है। किसान हर बार सरकार व प्रशासन से फसल के मुआवजे की मांग करते हैं परंतु उन्हें आज तक सरकार व प्रशासन की ओर से फसल के हुए नुक्सान के मुआवजे के रूप में एक फूटी कौड़ी भी नहीं मिल पाई है।
सरकार व प्रशासन की बेरुखी के कारण किसानों का खेती से मन उचाट हो गया है। किसानों का कहना है कि उनकी 80 प्रतिशत फसल बंदरों ने बर्बाद कर दी है और जो थोड़ी बहुत फसल बची थी उसका काम तूफान ने कर दिया है। फसल बर्बाद हो जाने से अब उन्हें अपने परिवार के पालन-पोषण की चिंता सताने लगी है। ऊंचे क्षेत्रों के लोग मक्की की फसल पर निर्भर होते हैं परंतु फसल बर्बाद हो जाने से उन्हें भी आर्थिक रूप से नुक्सान उठाना पड़ा है। अब उन्हें पशु चारे की समस्या खड़ी हो गई है। किसानों ने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि उन्हें फसल के हुए नुक्सान का मुआवजा केसीसी फसल बीमा योजना के तहत दिया जाए ताकि उन्हें परिवार के पालन-पोषण के लिए परेशानी का सामना न करना पड़े।

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