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जेमफिल येशी का शव शुक्रवार को सुबह 9 बजे के करीब दिल्ली से मैक्लोडगंज पहुंचा

धर्मशाला   जेमफिल येशी का शव शुक्रवार को सुबह 9 बजे के करीब दिल्ली से मैक्लोडगंज पहुंचा। जैमफिल येशी ने चीन के राष्ट्रपति के भारत आगमन के विरोध में प्रदर्शन के दौरान 26 मार्च को दिल्ली में आत्मदाह कर लिया था जिसमें जैमफिल 90 प्रतिशत झुलस गया तथा मृत्यु हो गई। शुक्रवार को जैमफिल येशी के शव को मैक्लोडगंज में तसुगलगखंग टैम्पल में रखा गया। यहां तिब्बती सामुदाय की तरफ से प्रार्थना का आयोजन किया गया था। इस प्रार्थना के दौरान हजारों की तादात में तिब्बती सामुदाय के लोगों ने एकत्रित होकर प्रार्थना में हिस्सा लिया जिसमें स्कूली बच्चे,तिब्बती सामुदाय के युवक,भिक्षु तथा तिब्बती प्रशासन भी शमिल था। जैमफिल येशी का जन्म खम तावू में हुआ था जो 2006 में भारत पहुंचा। जैमफिल धर्मशाला में तिब्बतीयन ट्रांसिट स्कूल में साडे तीन साल तक पढ़ा। शुक्रवार को जैमफिल को अंतिम विदाई के वक्त उसके साथियों की आंखे आंसूओं से नम थी।
महामहिम दलाईलामा नहीं हुए प्रार्थना में शामिल
जहां जेमफिल येशी को अंतिम विदाई देने के लिए हजारों की तादात में तिब्बती भिक्षुओं तथा प्रशासन के लोग शामिल थे वहीं महामहिम दलाईलामा इस प्रार्थना में शामिल नहीं हुए। उनके अलावा तिब्बतीयन निर्वाचित सरकार के प्रधान मंत्री लोबसांगसांगे भी इस प्रार्थना में शमिल नहीं थे।
अंतिम संस्कार के बाद भी होती रही नारेबाजी
शुक्रवार को जब जैमफिल का अंतिम संस्कार हो गया उसके बाद भी मैक्लोडगंज में तिब्बतीयन यूथ कांग्रेस द्वारा नारेवाजी होती रही। इस दौरान तिब्बतीयन युवकों ने भारी संख्या में जलूस निकाला तथा चीन के खिलाफ नारेवाजी की।
पुलिस रिजर्व फोर्स थी मैक्लोडगंज में तैनात

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