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जिला उद्यान विभाग बिलासपुर द्वारा कंदरौर स्थित भुड में बागवानी तकनीकी मिशन के तहत आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर आज संपन्न हो गया।

 दिनांक 22 सितंबर, 2013
जिला उद्यान विभाग बिलासपुर द्वारा कंदरौर स्थित भुड में बागवानी तकनीकी मिशन के तहत आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय प्रशिक्षण शिविर आज संपन्न हो गया। शिविर में कंदरौर पंचायत तथा आसपास के गांवों के लगभग 300 बागवानों ने भाग लिया। समापन समारोह में बागवानी निदेशक डा. गुरदेव सिंह ने बतौर मुख्यातिथि शिरकत की।
बागवानी निदेशक डा. गुरदेव सिंह ने बागवानों को संबोधित करते हुए कहा कि बागवानों को अधिक से अधिक फलदार पौंधे लगाने चाहिए ताकि उनकी आर्थिकी में सुधार हो सके। उन्होंने बताया कि वर्तमान परिवेश में मनुष्य विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हैं तथा ऐसे में फलों का अधिक मात्रा में सेवन करना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने लोगों से आहवान किया कि क्षेत्र में पीकानट किस्म के अखरोट के पौधे लगाएं क्यांेकि यह क्षेत्र जलवायु की दृष्टि से इसकी खेती के अनुकूल है। उन्होंने कहा कि इसके उत्पादन से लोगों को अपने गांव में जहां फल उपलब्ध होंगे वहीं बड़ी पैमाने पर इसकी खेती करने से लोग अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकते हैं। उन्होंने बताया कि अमरूद की सघन खेती बाहरी राज्यों में होती है। उन्होंने इस खेती को हिमाचल में अपनाने पर भी बल दिया क्योंकि सर्दियों में भी इसकी फसल प्राप्त कर बागवानी अपनी आय में वृद्धि कर सकते हैं।
उन्होंने बागवानों का आह्वान किया कि जहां पर अधिक कोहरा पड़ता है वहां पर वे अनार की खेती को अपनाएं। उन्होंने कहा कि इस खेती को अपनाने से बागवानों को अच्छी आय प्राप्त हो सकती है। डा. सिंह ने महिलाओं का भी आहवान किया कि वे पारंपरिक कृषि, पशुपालन व्यावसाय के साथ-साथ बागवानी को भी अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को बेहतर बना सकती हैं। उन्होंने कहा कि जिन बागवानों के पास जमीन नहीं हैं वे मधुमक्खी पालन तथा मशरूम की खेती कर अपना तथा अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकते हैं। इस अवसर पर निदेश डा. गुरदेव सिंह ने बागवानों को प्रूनिंग के लिए बागवानी किटे भी वितरित की।
इससे पहले उपनिदेशक उद्यान डा. शशि शर्मा तथा विभाग के अन्य अधिकारियों द्वारा मुख्यातिथि का स्वागत किया गया तथा उन्हें शाॅल व स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया। डा. शर्मा ने लोगों का आह्वान किया कि वे विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ उठाएं तथा बागवानी को बढ़ावा दें। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा समय-समय पर बागवानों के लिए प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन किया जाता है तथा फलोत्पादन को बढ़ाने के लिए नवीनतम तकनीकों की जानकारी दी जाती है। उन्होंने बताया कि आने वाले समय में विभाग द्वारा जल भंडारण के बड़े टैंक बनाकर बागवानों के लिए वर्षा जल संग्रहण टैंकों में हर मौसम में पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी ताकि उन्हें किसी प्रकार की समस्या पेश न आए।
इस अवसर पर जैविक प्रौद्योगिकी पर्यावरण संस्थान हमीरपुर स्थित नेरी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. संजीव बन्याल ने उद्यान प्रबंधन, डा. शशि शर्मा ने कोहरा प्रबंधन तथा इसके बचाव, डा. रेशमा नेगी ने पुष्पोत्पादन तथा डा. विकास शर्मा ने उद्यान प्रबंधन के उपर विस्तार से बागवानों को जानकारी दी। इसी प्रकार बागवानी व वानिकी विश्वविद्यालय सोलन स्थित नौणी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डा. मुनीष शर्मा ने सब्जियों के उत्पादन तथा इसकी बीमारियों की रोकथाम के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
इस अवसर पर एसएमएस मुख्यालय डा. विनोद शर्मा, एसएमएस सदर डा. रामलाल संधु, एसएमएस घुमारवीं, एसएमएस डा. राकेश धीमान, प्रदेश कांग्रेस सेवादल के संगठक सुरेंद्र ठाकुर, डा. कर्मचंद मस्ताना, एचडीओ सदर डा. अमित शर्मा, डा. वीएस डेल्टा, डा. सोमदेव शर्मा, डा. अखिलेश सिंह, एचडीओ स्वारघाट डा. सरिता शर्मा, स्थानीय ग्राम पंचायत प्रधान उर्मिला शर्मा, उपप्रधान सुरेंद्र सिंह, प्रदेश सहित विभिन्न पंचायतों, महिला मंडलों के सदस्य उपस्थित थे। इति

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