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छह मकान जले दो करोड़ स्वाह

rohru-seema-mae-do-makano-mae-aag-lagne-se-karoro-ke-sampati-rakh.-makan-mae-uthta-dhua14-300x225रोहडू,रिकांगपिओ  — रोहड़ू से पांच किलोमीटर दूर सीमा के साथ गुरुवार रात को आग लगने से एक चार मंजिला और दो मंजिला मकान से जलने जहां करोड़ों रुपए की संपत्ति नष्ट हो गई, वहीं इससे आठ परिवार भी बेघर हो गए। हालांकि आग लगने से कोई जानी नुकसान नहीं हुआ। धुआं उठते ही दोनों मकानों में रह रहे परिवारों के सदस्य बाहर आ गए थे। एक घर में बारह से अधिक कमरों और दूसरे घर में आठ कमरों का नुकसान हुआ है। पीडि़तों को  प्रशासन ने दो लाख की फौरी राहत भी प्रदान की है और साथ ही कंबल, तिरपाल और बरतन भी वितरित किए गए। तहसीलदार गुरमीत सिंह ने मौके पर जाकर नुकसान जायजा लिया और डेढ़ करोड़ रुपए के नुकसान होने की पुष्टि की है। एक मकान में रह रहे छह परिवार में रोशन लाल बांश्टू, बलवीर बांश्टू, जिला लाल बांश्टू, दिनेश बांश्टू, योगेश्वर बांश्टू, जनेश्वर बांश्टू शामिल हैं, वहीं साथ लगते दूसरे मकान में प्यारे लाल और बुध नाथ का परिवार शामिल है। जनेश्वर बांश्टू के मुताबिक घरों में रखी ज्वेलरी, डेढ़ सो बिस्तरें, बरतन भी आग की भेंट चढ़ गए। उन्होंने बताया कि आग लगने से करीब पांच करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। उधर किन्नौर जिला के मीरू गांव में गुरुवार रात को हुई भीषण अग्निकांड की घटना में चार परिवारों के मकान जल कर राख हो गए। इस भीषण आग की घटना में मीरू निवासी बालक राम, भागरती, इंद्र सुख तथा राजेश कुमार के मकान पूरी तरह जल कर राख हो गया। आग से 50 कमरे जल कर राख हो गए। प्रारंभिक नुकसान का अनुमान 50 लाख रुपए से भी अधिक बताया जा रहा है। पंचायत उपप्रधान मीरू ज्ञाछो नेगी ने  बताया कि घटना  रात करीब साढ़े दस बजे की है। उन्होंने बताया कि आग लगने के कारणों का अब तक सही पता नहीं चल  पाया है। आग  इतनी भयंकर थी कि ग्रामीणों के अथक प्रयासों के बावजूद चारों परिवारों के मकानों को नहीं बचाया जा सका। इस घटना में चारों परिवार अपने घरों का कुछ भी सामान नहीं बचा पाए। घटना में सोना, चांदी से लेकर घर का हर सामान राख हो गया। ग्रामीणों के प्रयासों से आग को अन्य मकानों में फै लने से रोका गया अन्यथा दर्जनों और मकान भी आग की चपेट में आ सकते थे।  शुक्रवार को पुलिस सहित राजस्व विभाग के कानूनगो सहित पटवारी ने घटनास्थल का दौरा कर नुकसान का जायजा लेने के बाद पीडि़तों  को दस—दस हजार रुपए फौरी राहत के रूप में प्रदान किए।

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