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चीनी मिलों की मदद को सरकार का प्लान

नई दिल्ली, सरकार नकदी संकट का सामना कर रहे चीनी मिलों को 4000 रुपए प्रति टन की अधिक सहायता देकर चालू विपणन वर्ष 2014-15 के लिए कच्ची चीनी के निर्यात पर सबसिडी बढ़ाने पर विचार कर रही है। पिछले वर्ष केंद्र ने किसानों के गन्ना के बकाए के भुगतान में मदद करने के लिए नकदी संकट का सामना कर रहे चीनी मिलों को 40 लाख टन कच्ची चीनी का निर्यात करने के लिए सबसिडी देने की घोषणा की थी। यह सबसिडी योजना सितंबर 2014 में समाप्त हो गई। सरकारी सूत्रों ने कहा कि विपणन वर्ष 2014.15 (अक्तूबर से सितंबर) के लिए कच्ची चीनी के निर्यात पर सबसिडी देने का प्रस्ताव सक्रिय रूप से विचाराधीन है। निर्धारित पद्धति के आधार पर मौजूदा बाजार कीमत की स्थिति पर विचार करते हुए सबसिडी की गणना 4000 रुपए प्रति टन के करीब की गई है। एक अन्य सूत्र ने बताया कि एक मंत्रिमंडलीय परिपत्र पहले ही तैयार किया गया है तथा खाद्य मंत्री रामविलास पासवान की मंजूरी के लिए जाएगा। पिछले वर्ष केंद्र ने हर दो महीने पर सबसिडी की मात्रा के बारे में समीक्षा करने का फैसला किया था। भारतीय चीनी मिल संघ (इस्मा) ने कहा कि घरेलू चीनी कीमतें उत्पादन लागत से पर्याप्त रूप से कम हैं और चीनी मिलों के लिए किसानों को गन्ना बकाये का भुगतान करना भी मुश्किल हो गया है। दुनिया में ब्राजील के बाद चीनी को दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश भारत में चीनी उत्पादन चालू 2014-.15 के सत्र के पहले तीन महीनों में चीनी उत्पादन 27.3 प्रतिशत बढ़कर 74.6 लाख टन हो गया। इस्मा ने चालू सत्र के लिए 2.5 से 2.55 करोड़ टन चीनी उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया है, जबकि सरकार का अनुमान समान अवधि में दो करोड़ 50.5 लाख टन उत्पादन का है।

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