Header ad
Header ad
Header ad

चारों दोषियों को मिली सजा-ए मौत: ( रवि )

पिछले साल 16 दिसंबर को सामूहिक बलात्कार और हत्या के मामले में चारों दोषियों को दिल्ली की एक फास्ट ट्रैक कोर्ट ने शुक्रवार को सजा सुनाते हुए कहा कि ‘सभी को मौत’. अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश योगेश खत्रा ने कहा, दोषियों ने जो गंभीर अपराध किया है उसे बरदाश्त नहीं किया जा सकता है. मुकेश, अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता और विनय शर्मा द्वारा किया गया अपराध ‘दुर्लभतम’श्रेणी में आता है, जिसके लिए सजा -ए- मौत अनिवार्य है. उधर, बचाव पक्ष के वकील एपी सिंह ने कहा कि यह फैसला सरकार के इशारे पर किया गया. सबूतों को नजरअंदाज किया गया है.इससे पहले भी कई रेप हुए, हत्या के मामले सामने आये, लेकिन उनमें फांसी नहीं हुई. उदाहरण बने : आदेश का कुछ हिस्सा पढ.ते हुए न्यायाधीश खत्रा ने कहा, जिस जघन्य तरीके से पीड.िता के साथ गैंगरेप किया गया और उसकी हत्या की गयी, उसकी कोई तुलना नहीं है. मामला दुर्लभ से दुर्लभतम की श्रेणी में आता है और इसके लिए ऐसी सजा दी जानी चाहिए जो एक उदाहरण हो. इस घटना से देश भर में आक्रोश की लहर फैल गयी थी. मजबूरन सरकार को कठोर बलात्कार विरोधी कानून लाना पड.ा था.
रोने लगे आरोपी : फांसी की सजा सुनकर विनय अदालत में रोने लगा, जबकि तीन अन्य दोषी- मुकेश, पवन, अक्षय माफी के लिए गुहार लगाने लगा. इसके अलावा, सजा सुनाये जाने के वक्त पीड.िता के पिता और दोनों भाई भी खचाखच भरे अदालत कक्ष में मौजूद थे.
अक्षय के घर कोहराम: फैसला आते ही दोषी अक्षय ठाकुर के परिवार ने इस फैसले पर सवाल उठा दिया. औरंगाबाद के रहने वाले अक्षय ठाकुर की पत्नी ने फैसले को गलत ठहराया है. अक्षय की पत्नी नमिता के मुताबिक इस फैसले के पहले अदालत को उसके और उसके ढाई साल के बच्चे के बारे में भी सोचना चाहिए था.
ठहराया गया था दोषी :10 सितंबर को चारों को हत्या के अलावा सामूहिक बलात्कार, प्राकृतिक अपराध, हत्या के प्रयास, डकैती, सबूतों को नष्ट करने, साजिश, हत्या के लिए अपहरण का भी दोषी ठहराया गया था. चारों को हालांकि डकैती में हत्या के आरोप से बरी कर दिया गया है. सजा पर बहस 11 सितंबर को पुरी हुई थी.
देश भर में विरोध : इस घटना ने देश को झकझोर कर रख दिया और विरोध प्रदर्शन होने लगे. केंद्र और दिल्ली सरकार ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्‍चित करने, ऐसी घटनाओं को रोकने और मामलों के त्वरित निबटारे के लिए कई तरह के कदम उठाये.
क्या है मामला : पिछले साल 16 दिसंबर की रात राम सिंह, विनय, अक्षय, पवन, मुकेश और एक नाबालिग ने एक लड.की से सामूहिक बलात्कार किया था. चलती बस में लड.की और उसके 28 वर्षीय दोस्त के साथ मारपीट की गयी. 29 दिसंबर, 2012 को लड.की ने सिंगापुर की एक अदालत में दम तोड. दिया.
दामिनी की गवाही अहम: इस मामले में दो गवाहियां बेहद अहम रहीं. एक खुद दामिनी की और दूसरी उसके दोस्त की. मौत से पहले अस्पताल में जब दामिनी से पूछा गया था कि दोषियों के लिए वह क्या सजा चाहती है, तो उसने फांसी की मांग की थी. फिर अगले ही क्षण उसने कहा था कि दोषियों को जिंदा जला देना चाहिए.
फांसी की सजा चारों दोषियों को कड.ी चेतावनी है. इस फैसले के बाद लोग ऐसी घिनौनी हरकत करने से पहले सौ बार सोचेंगे. इससे देश में अच्छा संदेश गया है.

.

Share

About The Author

Related posts

Leave a Reply

 Click this button or press Ctrl+G to toggle between multilang and English

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Please Solve it * *