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’गौवंश प्रजनन और दुग्ध विकास परियोजना के अन्तर्गत 2387.51 लाख रूपये की

शिमला, ग्रामीण विकास एवं पशु पालन मंत्री अनिल शर्मा ने कहा कि भारत सरकार ने राष्ट्रीय गौवंश प्रजनन और दुग्ध विकास परियोजना के अंतर्गत 2387.51 लाख रूपये की धनराशि स्वीकृत की है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा जारी यह राशि परियोजना की कुल लागत 612.91 लाख रूपये की पहली किश्त के तौर पर जारी की गई है। शर्मा ने कहा कि यह परियोजना हिमाचल प्रदेश पशुधन एवं कुकुट विकास बोर्ड द्वारा क्रियान्वित की जाएगी। उन्होंने कहा कि इसका क्रियान्वयन वित्त वर्ष 2014-15 से आरम्भ होकर अगले पांच वर्षों में किया जाएगा। पशु पालन मंत्री ने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान नेटवर्क में विस्तार परियोजना की एक मुख्य गतिविधि होगी और सभी केंद्रों को कृत्रिम गर्भाधान सुविधाओं से युक्त बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि वर्तमान 2094 कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों का आधुनिक उपकरण मुहैया करवाकर सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कृत्रिम गर्भाधान केंद्रों में कार्यरत कर्मियों के कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, साहिवाल और पहाड़ी गाय जैसी स्वदेशी नस्लों के सरंक्षण को प्रोत्साहन दिया जाएगा और बगथान फार्म की अधोसंरचना को भी सुदृढ़ किया जाएगा। शर्मा ने कहा कि प्रदेश में किसानों के लिए 300 जागरूकता शिविरों का जिनमें प्रति शिविर 100 किसान हों, का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों में किसानों को प्रबंधन, वैज्ञानिक तरीके से पशुधन की नस्ल और चारा देने के बारे में जागरूक किया जाएगा। अगले पांच सालों के दौरान 1320 नसबन्दी शिविर लगाए जाएंगे और नए बछड़ों को टैग लगाकर चिन्हित करके कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम का अनुश्रवण किया जाएगा। नस्ल सुधार से संबंधित डाटा को अस्पताल स्तर तक कंप्यूट्रिकृत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन ग्राम पंचायतों में कृत्रिम गर्भाधान सुविधा उपलब्ध नहीं करवाई जा सकती, वहां साहिवाल व रैड सुधी जैसे स्वदेशी नस्ल के बैल गर्भाधान के लिये उपलब्ध करवाएं जाएंगे।

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