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खरीदी गई भूमि की जांच शुरू करने का स्वागत किया

मंडी, 15 अक्तूबर (पुंछी):माक्र्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव भूपेन्द्र सिंह और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के जिला सचिव ललित ठाकुर ने हिमाचल सरकार द्वारा पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुये भूमि घोटालों और गैर कानुनी तरीकों से बेची और खरीदी गई भूमि की जांच शुरू करने का स्वागत किया है। परन्तु वामपंथी दलों की सरकार से मांग है कि पिछले समय में हुये सभी संदिग्ध भूमि सौदों व घोटालों की निष्पक्ष जांच करवाई जाये और केवल राजनैतिक द्घिवेश के चलते कुछ चुनिदंा मामलों की ही जांच न की जाये। जब राज्य सरकार ने भाजपा के पूर्व मुख्यमंत्री के बेटों द्वारा खरीदी गई भूमि के बारे जांच बिठाई तो अब भाजपा ने भी वीरभद्र सिंह व अन्य मंत्रियों के खिलाफ जांच की मांग शुरू कर दी हैं। परन्तु जब भाजपा सत्ता में थी तो उन्होंने इन मसलों पर कुछ भी कार्यवाही नहीं की जिससे साफ होता है कि ये दोनों पार्टियां इस तरह के सौदों में शामिल रहती है और जब कोई एक पार्टी बदला लेने की भावना से कार्यवाही शुरू करती है तो तब दूसरी पार्टी अपने बचाव में मुद्दे उठाती हैं और जनता का ध्यान मुख्य मुद्दों से हटाने का काम करती हैं। मंडी जिला मुख्यालय में पांच वर्ष पूर्व राजमहल धरोहर संपति (जमीन और भवन) को बेचने व खरीदने का मामला सामने आया था जिसमें भाजपा के मंडल अध्यक्ष ने पावर ऑफ अटार्नी लेकर जमीन व संपति बेची थी और कांग्रेस पार्टी के विधायक व वर्तमान मंत्री व एक अन्य व्यक्ति जिसका नाम खूबराम है ने वह संपति खरीदी थी। जिसमें उन्होंने संपति की रजिस्ट्री करवाते समय उसका मूल्य कम दर्शाया था और स्टैंप डियूटी भी कम अदा की थी। रजिस्ट्री तहसीलदार के बजाये जिला राजस्व अधिकारी ने की थी जो नियमानुसार सही नहीं थी। जिस कारण उन्हें पुलिस हिरासत में रहना प$डा था। इस भूमि व संपति हस्तांतरण बारे न्यायलय में मामला चल रहा है जिसमें बेनामी भूमि ट्रांजक्शन एक्ट और आईपीसी के तहत मामला दर्ज हैं। इस संपति के खरीदने वाले एक खरीददार खूबराम के पास इसे खरीदने के लिए कहां से इतनी राशि आई उसकी कोई जानकारी नहीं हैं। दूसरे खरीददार अनिल शर्मा (वर्तमान मंत्री) को इस मुकदमें में पार्टी ही नहीं बनाया गया हैं। जबकि बेनामी ट्राजकशंन एक्ट के अनुसार सभी खरीददारों को पार्टी बनाना जरूरी होता हैं। इसलिए सीपीआई और सीपीआई (एम) जिला कमेटियां मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री से मांग करती है कि इस संपति के सौदे की सीबीआई या न्यायिक जांच नये सिरे से करवाई जाये। क्योंकि यह संपति धरोहर संपति घोषित की गई है। जिसे बेचने व खरीदने में भाजपा और कांग्रेस दोनों पार्टियों के नेता शामिल हैं और इस संपति के दूसरे खरीददार अनिल शर्मा को भी पार्टी बनाकर मुकदमा चलाया जाये। यदि वर्तमान कांग्रेस नेतृत्ववारी सरकार सही अर्थो में भूमि घोटालों की जांच करवाना चाहती है तो उन्हें इस हाई प्रोफाईल व संदिग्ध संपति सौदे की भी जांच करवानी चाहिए या फिर इस सौदे के बारे में सरकार को अपनी स्थिति जनता में स्पष्ट करनी चाहिए। वामपंथी पार्टियां यह भी मांग करती है कि सरकार को एक नीति बनाकर सभी जिला उपायुक्तों को इस तरह की भूमि व संपति की खरीद बारे पूरी रिपोर्ट तैयार करके उसपर कार्यवाही करने का निर्णय लेना चाहिए अन्यथा वर्तमान में जो कुछ सौदों पर ब्यानबाजी व जांच हो रही है वह केवल जनता का ध्यान हटाने का ही कार्य करेगी।

 

 

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