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केजरीवाल VS किरण बेदी: ताकत और कमजोरी

default (25)नई दिल्ली: आखिरकार देश की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी दिल्ली की राजनीति में कूद ही पड़ीं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली में उन्हें भाजपा की सदस्यता दिलाई। किरण बेदी के आने से दिल्ली की राजनीति में सियासी पारा और चढ़ गया है। किरण बेदी दिल्ली विधानसभा चुनाव भी लड़ेंगी ये भी तय हो गया है, लेकिन किस सीट से लडेंगी यह स्थिति अभी भी स्पष्ट नहीं हो पाई है। लेकिन किरण बेदी को लेकर राजनीति के गलियारे में अटकलें यही लगाई जा रही हैं कि क्या किरण बेदी दिल्ली में भाजपा का सीएम चेहरा हो सकती हैं? क्या आप संयोजक केजरीवाल का जवाब दिल्ली में बीजेपी के लिए किरण बेदी ही हैं? अन्ना के इन दो क्रांतिकारियों ने एक साथ लोकपाल आंदोलन में हिस्सा लिया और इस आंदोलन का अहम सदस्य भी रहे। लेकिन यह सामाजिक आंदोलन मात्र डेढ़ साल बाद ही एक राजनीतिक पार्टी की तरफ बढ़ चला तो किरण ने राजनीति में आने से इंकार करते हुए केजरीवाल के साथ चलने से साफ तौर पर इंकार कर दिया। आज जब किरण बेदी राजनीति में आईं तो उनका मुकाबला अपने ही साथी अरविंद केजरीवाल से हो रहा है। आइए, इन दो नेताओं की ताकत और कमजोरियों पर डालते हैं एक नजर-
किरण बेदी की ताकत-
1-भाजपा की गंभीर और प्रतिबद्ध नया चेहरा होंगी।
2-केजरीवाल के धुआंधार प्रचार अभियान को काट सकेंगी।
3-भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई में शसक्त सिपाही की छवि।
4-अमित शाह की सरपरस्ती में भाजपा में व्यापक स्वीकार्यरता।
5-भाजपा के अंदरूनी लड़ाई पर रोक लगाने की संभावना।
6-सीधे हमले से बचेंगे केजरीवाल।
किरण बेदी की कमजोरी-
1- चुनावी राजनीति के मैदान में पहली पारी। बेदी बेहतर प्रशासक रही हैं, लेकिन नेता के रूप में उनका आंकलन किया जाना बाकी है।
2-संगठन में स्वीकार्यता बढ़ाने और कार्यकत्र्ताओं का विश्वास जीतने के लिए करनी होगी मशक्कत।
3-चर्चित चेहरा रही हैं, लेकिन कोई व्यापक जनाधार या खास क्षेत्र से जुड़ाव नहीं।
केजरीवाल की ताकत-
1-राजनीति की बेहतर समझ और कुशल रणनीतिकार।
2-बतौर मुख्यमंत्री अपनी क्षमता शाबित कर चुके हैं।
3-साफ-सुथरी और ईमानदार छवि।
4-मध्यम और निचले तबकों में ब्यापक स्वीकार्यता।
5-मीडिय़ा का ध्यान आकर्षित करने और लाइमलाइट में बने रहने में माहिर।
केजरीवाल की कमजोरी-
1-संगठन में टूट और पार्टी में बगावत रोके रहने में नाकाम।
2- 49 दिनों में सरकार गिरने के बाद बिगड़ी छवि को सुधारने के लिए करनी होगी मशक्कत।
3-आरोपों का राजनीति में माहिर। पहले भी कई बड़े नेताओं पर आरोप लगा चुके हैं, लेकिन कुछ साबित नहीं कर पाए। 

केजरीवाल और किरण बेदी में समानताएं-
1- दोनों ही सरकारी अधिकारी रह चुके हैं।
2-समाज में काम करने के लिए नौकरी छोड़ी।
3-भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ा।
4-मैग्सैसे पुरस्कार मिला है।
5-इंडिया अर्गेंस्ट करप्शन के सदस्य बने।
6-अन्ना के लोकपाल आंदोलन में सक्रिय रहे।
7-अन्ना आंदोलन से अलग होकर काम करने लगे।
8-गैर-सरकारी संस्था का संचालन करते हैं।
9-समाज सेवा के बाद राजनीति में कदम रखा।
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