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कुल्लू सफलता की कहानी

कृषि विभाग लघु सिंचाई सुविधाओं के लिए दे रहा अनुदान
किसानों-बागवानों को आधुनिक खेती के लिए प्रेरित करने के साथ-साथ प्रदेश सरकार उन्हें सूक्ष्म व लघु सिंचाई सुविधाएं मुहैया करवाने के लिए भी अनुदान दे रही है। कृषि विभाग के भू संरक्षण विंग के माध्यम से किसानों व बागवानों को सूक्ष्म व लघु सिंचाई सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं। कुल्लू जिला के किसान-बागवान भू संरक्षण विंग से अनुदान प्राप्त करके ये सुविधाएं जुटाकर पैदावार बढ़ाने में सफल हो रहे हैं। ऐसे ही एक किसान हैं लगघाटी के गांव डुघीलग के इंद्र चंद।
भू संरक्षण विंग के अधिकारियों की प्रेरणा से इंद्र चंद ने अपनी जमीन पर जल संग्रहण टैंक बनाने हेतु सब्सिडी लेने के लिए आवेदन किया। उसने केवल अपनी जमीन का ततीमा विभागीय कार्यालय में पेश किया और उसे टैंक निर्माण के लिए पैंतीस हजार रूपये का अनुदान मिल गया। इस धनराशि से उसने 13 गुणा 14 फुट का जल संग्रहण टैंक बनाया, जिससे उसके खेतों को सिंचाई सुविधा मिली। खेतों को सिंचाई सुविधा मिलने से उसने कई नकदी फसलों की बुआई आरंभ की। अब उसे अपने खेतों से काफी अच्छी आय मिल रही है। जल संग्रहण टैंक के निर्माण ने तो उनकी तकदीर ही बदल दी। अब वह अपने खेतों में पारंपरिक फसलों के अलावा जापानी फल, गोभी और अन्य सब्जियां पैदा कर रहे हैं। टैंक निर्माण के बाद वह टपक व स्प्रिंकलर सिंचाई सुविधाएं भी अपनाने की ओर अग्रसर है, क्योंकि इन आधुनिक सिंचाई सुविधाओं के लिए प्रदेश सरकार अस्सी प्रतिशत तक अनुदान दे रही है।
भू संरक्षण अधिकारी पवन ठाकुर ने बताया कि सामूहिक रूप से टैंक बनाने के लिए किसानों के समूहों को शत-प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। पांच-छह किसानों का समूह मिलकर टैंक निर्माण के लिए भू संरक्षण विंग से सब्सिडी पा सकता है। यह सब्सिडी लेने की प्रक्रिया भी बहुत ही आसान है। केवल अपनी जमीन का ततीमा जमा करवाकर किसान टैंक निर्माण के लिए धनराशि प्राप्त कर सकते हैं। कोई भी किसान निजी जल संग्रहण टैंक के लिए भी आवेदन कर सकता है। इसके लिए आवेदक किसान को पचास प्रतिशत अनुदान मिलेगा। उन्होंने बताया कि टपक व स्प्रिंकलर सिंचाई सुविधाओं के लिए विभाग की ओर से अस्सी प्रतिशत तक अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने किसानों से आग्रह किया है कि वे इन अनुदान योजनाओं का लाभ उठाकर अपनी आर्थिकी सुदृृढ़ करें।

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