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किसानों का मददगार नाषीजीव प्रबंधन

7 सितम्बर पालमपुर : प्रदेश में जैव खेती को प्रोत्साहित करने के लिए राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला, पालमपुर महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर रही है। कृषि विभाग द्वारा वर्ष 1998 में स्थापित पहली जैव नियंत्रण प्रयोगशाला किसानों की फसलों को नष्ट करने वाले कीड़ों की रासायनिक दवाईयों के बगैर रोकथाम करने में सफल प्रयास कर रही है।
फसलों की पैदावार बढ़ाने तथा उनमें लगने वाली बीमारियों से बचाव करने के लिए अन्धाधुंध रासायनिक दवाईयों का प्रयोग किसानों द्वारा किया जा रहा है। इससे उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य पर न केवल प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है बल्कि अनेक बीमारियां भी पैदा होने लगी हैं। रसायनिक कीटनाशक का प्रयोग किसानों का ही विनाशकारी है। जब वह उसका प्रयोग फसलों के बचाव के लिए करता है तो उसका प्रभाव उसके शरीर पर भी पड़ता है। ऐसा कृषि वैज्ञानिकों का मानना है।
जैव नियंत्रण प्रयोगशाला, पालमपुर द्वारा करीब 10 किस्म के मित्र कीटों को पैदा करके किसानों को निःशुल्क वितरित किया जाता है तथा उनके सार्थक परिणाम भी सामने आए हैं। प्रयोगशाला द्वारा अब तक करीब चार करोड़ मित्र कीट जि़ला कांगड़ा के किसानों को वितरित किए जा चुके हैं जिससे न केवल रसायनिक दवाईयों के प्रयोग में कमी आ रही है बल्कि पर्यावरण को बचाने में भी सहायता मिली है।
किसानों को कीटनाशक जहरीली दवाईयों का कम इस्तेमाल करने तथा मित्र कीट पैदा करके फसलों का बचाव करने के लिए पे्ररित किया जा रहा है। प्रयोगशाला के वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिवर्ष करीब 500 किसानों को मित्र कीट एवं मित्र जीव का प्रयोग करने के लिए प्रशिक्षित किया जा रहा है। यही नहीं कृषि विभाग के वैज्ञानिकों द्वारा प्रतिवर्ष करीब 200 हैक्टेयर क्षेत्र को प्रतिवर्ष मित्र कीट एवं जीव का प्रयोग करके फसलों का बचाव किया जा रहा है। प्रदेश सरकार द्वारा किसानों को एकीकृतनाशी जीव प्रबन्धन के माध्यम से फसलों को कीड़-मकौड़ों द्वारा किए जाने वाले नुकसान से बचाने के लिए प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर जैव नियंत्रण प्रयोगशाला खोली गई है कांगड़ा के जाच्छ शिमला के नवबहार, सोलन के चम्बाघाट और मंडी शामिल है।
राज्य जैव नियंत्रण प्रयोगशाला, पालमपुर के प्रभारी डा0 आनंद पराशर ने बताया कि फसलों की बिजाई से लेकर कटाई तक करीब 33 प्रतिशत नुकसान कीड़े-मकौड़ों द्वारा और फसलों में लगने वाले खरपतवारों से हो जाता है। करीब 50 प्रतिशत फसलें कीड़ों के माध्यम से लगने वाली बीमारियों से नष्ट हो जाती है। यदि फसलों में लगने वाले कीड़ों की पहचान समय पर हो जाती है तो जैव नियंत्रण के माध्यम से बिना दवाईयों के फसलों में लगने वाली बीमारियों की रोकथाम की जा सकती है।
जैव नियंत्रण प्रयोगशाला के सार्थक परिणामों से न केवल रासायनिक कीट नाशक के इस्तेमाल से निजात मिलेगी बल्कि जहरीली दवाईयों के प्रयोग से उत्पादित खाद्य वस्तुओं के बजाए शुद्ध रासायनिक प्रयोग रहित सब्जियां, फल व अनाज आदि प्राप्त होगा। जैव नियंत्रण प्रयोगशाला किसानों के लिए अन्धाधुंध पैस्टीसाइड रहित फसलों को उत्पादन करने में वरदान साबित होगी। प्रयोगशाला का एकीकृत नाषीजीव प्रबधन किसानों को मददगार साबित हो रहा है, जिसके माध्यम से सुरक्षित कीटनाशकों को सही समय पर सही मात्रा में प्रयोग करने की जानकारी किसानों को मिल रही है।

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