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किशोरों को न्याय देगी बाल कल्याण समितियां: शर्मा–बाल कल्याण समिति की बैठक में किशोर न्याय अधिनियम पर चर्चा

15 फरवरी कुल्लू : बच्चे राष्ट्र की सर्वोच्च संपत्ति है और मानव संसाधान विकास के लिए विभिन्न योजनाओं में बच्चों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए ताकि वे अच्छे नागरिक बन सकें। शुक्रवार को बाल कल्याण समिति की बैठक की अध्यक्षता करते हुए आईसीडीएस के राज्य परियोजना प्रबंधक जी.के. शर्मा ने यह अपील की। बैठक में चर्चा का मुख्य विषय ‘किशोर न्याय अधिनियम-2000 बालकों की देखभाल व संरक्षण’ रहा।
जी.के. शर्मा ने बताया कि सरकार ने प्रदेश में अठारह वर्ष से कम आयु के किशोरों को सभी सुविधाएं व अधिकार दिए हैं। किशोर न्याय बोर्ड व बाल कल्याण समिति बालकों को न्याय प्रदान करने की संवैधानिक संस्था है। शीघ्र ही सभी जिलों में ये समितियां कार्य करना आरंभ कर देंगी। इसके अलावा महिलाओं की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर व आंगनबाड़ी केंद्रों में शिशुओं को अधिक सशक्त बनाने की योजनाओं पर भी विचार किया जा रहा है।
बैठक में बाल अधिकारों, समन्वय, जागरूकता, प्रशिक्षण, निरीक्षण, कार्यालय व्यवस्था, अधिकारियों व कर्मचारियों की भर्ती, कंप्यूटर, स्टेशनरी, संदर्भ सामग्री और अन्य मुददों पर भी व्यापक विचार-विमर्श किया गया। इसके अलावा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग, आनी में बाल आश्रम, कुल्लू में शैल्टर होम खोलने बारे भी चर्चा की गई। इससे पहले जिला कार्यक्रम अधिकारी के कार्यालय परिसर में बैठक कक्ष का शुभारंभ भी किया गया।
इस मौके पर बाल कल्याण समिति के चेयरमैन शिव सिंह, सीडीपीओ निर्मला शर्मा, अधिवक्ता डोले राम, सत्याभामा, चाइल्डलाइन के समन्वयक पवन कश्यप् और महिला एवं बाल विकास विभाग के अन्य अधिकारी व कर्मचारी भी उपस्थित थे।

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