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कानून समाज की सीमाओं का निर्धारण करता है, कानून का सम्मान करना सभी की जिम्मेवारी-उपायुक्त

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कानून समाज को व्यवस्थित रखने के लिये इसकी सीमाओं का निर्धारण करता है। एक आदर्श समाज के लिये यह जरूरी है कि प्रत्येक व्यक्ति कानून का सम्मान करें। यह बात उपायुक्त सोलन मदन चौहान ने आज उनके कार्यालय अधिवेशन हाॅल में नेहरू युवा केन्द्र द्वारा ‘युवाओं में बढ़ते अपराध और न्यायिक सुधारों की जरूरत’ विषय पर एक दिवसीय जिला स्तरीय युवा कार्यशाला के अवसर पर बतौर मुख्य अतिथि कही। कार्यशाला में आई.टी.आई., सांई संस्थान, मुरारी लाल मैमोरियल संस्थान, डाईट व शूलिनी विश्वविद्यालय से करीब 200 युवाओं ने भाग लिया। चौहान ने कहा कि युवाओं के लिये समाज के ज्वलन्त मसलों पर समय-समय पर संवाद होने चाहिए। ऐसे संवादों के दौरान युवाओं की आकांक्षाओं और अपेक्षाओं का पता चलता है, वहीं उन्हें बुद्धिजीवियों और विषय विशेषज्ञों से विविध जानकारी मिलती है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक युवा समाज के लिये बहुत महत्व रखता है। इन युवाओं में कल के राजनेता, विद्वान और वैज्ञानिक हैं।
उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समाज में आधे से अधिक कुरीतियों और अपराधों को नशे की हालत में अंजाम दिये जाते हैं। नशेड़ी व्यक्ति सबसे पहले अपने को, फिर अपने परिवार को और अन्ततः समाज को कलंकित करता है। उन्होंने कहा कि जीवन में निराशा के लिये कोई स्थान नहीं होना चाहिए। निराशा दूसरों से तुलना करने पर और छोटी आयु में बहुत कुछ हासिल करने की जिज्ञासा से उत्पन्न होती है और अन्ततः अनेकों प्रकार के अपराधों को जन्म देती है। उन्होंने कहा कि इच्छाशक्ति और जुनून हो तो बेरोज़गारी कोई समस्या नहीं है। मेहनत और लग्न से किसी भी क्षेत्र में कामयाबी हासिल की जा सकती है। उन्होंने चिल्ड्रन पार्क में स्वयं सहायता समूहों द्वारा विभिन्न उत्पादों पर लगाई गई प्रदर्शनियों का उद्घाटन किया। बाद में उन्होंने उत्कृष्ट युवा वक्ताओं को सम्मानित भी किया। समारोह की अध्यक्षता करते हुए पुलिस अधीक्षक डा. रमेश छाजटा ने कहा कि युवावस्था में ऊर्जा होना स्वाभाविक है, लेकिन ऊर्जा के साथ संयम बहुत जरूरी है। दोनों के सामजस्य से जीवन में गुणात्मक बदलाव आते हैं। उन्होंने कहा कि अच्छे और बुरे में अन्तर के लिये लगातार चिंतन जरूरी है। युवाकाल में दिशा और सकारात्मक दृष्टिकोण जोश से अधिक महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि समाज में बदलाव के साथ नई चुनौतियां भी आती हैं, इस बात पर गौर किया जाना चाहिए। उन्होेंने युवाओं से कहा कि तकनीकी का इस्तेमाल अच्छी बातें ग्रहण करने के लिये किया जाना चाहिए। डाॅ. छाजटा ने कहा कि छोटे से आवेश से जीवन कलंकित हो जाता है। कड़ी मेहनत और अनुशासन से जीवन में किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि बच्चों पर परिवार, संस्थान और संगति का प्रभाव पड़ता है। युवा जो अच्छी बातें शिक्षा से, समाज से या अपने बुजुर्गों से ग्रहण करते हैं, उन्हें व्यवहारिक तौर पर अपनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि माता-पिता का आपसी तनाव बच्चे की जीवन पर नकारात्मक असर डालता है। उन्होंने युवाओं का आहवान किया कि वे नित्य जीवन में अच्छे व बुरे का एक बार विचार जरूर करके देखें, निश्चित तौर पर उनके जीवन में खुशहाली आएगी। इस मौके पर सांई संस्थान से रोहिणी छाजटा, शूलिनी विश्वविद्यालय की छात्रा दीपिका तलवार और साहिल, डाईट से ज्योति, आईटीआई से रंजना ने अपने ओजस्वी विचारों से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया। अधिवक्ता मनोज वर्मा ने विषय पर कानूनी पक्ष पर चर्चा की। पुलिस उप-अधीक्षक श्वेता ठाकुर और जिला भाषा अधिकारी भीम सिंह चौहान ने भी विचार रखें।

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