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काँगड़ा लोक सभा सीट पर तिकोने मुकाबले की संभावना राहुल की रैली कांग्रेस की उमीदें कर सकती है मज़बूत

chandershanta raajanधर्मशाला (अरविन्द शर्मा ) 18 मार्च

काँगड़ा लोक सभा सीट पर तिकोने मुकाबले की संभावना

राहुल की रैली  कांग्रेस  की उमीदें कर सकती है मज़बूत

 

राहुल गाँधी 20 मार्च को काँगड़ा संसदीय क्षेत्र को महत्त्व देते हुए हिमाचल में इस चुनावी दौर की अपनी पहली रैली कर रहे हैं I युवाओं को आगे रखते हुए बैनरों में राहुल के साथ वीरभद्र के पुत्र विक्रमादित्य को ही दर्शाया गया है I अंदर खाते में कांग्रेसियों  का वरिष्ठ वर्ग इस से नाराज़ है I हाल ही में सुजानपुर (हमीरपुर ) में आयोजित भाजपा की मोदी रैली के मुकाबले राहुल की धरमशाला रैली को हर सूरत में सफल बनाने हेतु हालांकी  कांग्रेसी जोर शोर से डटें  हैं परन्तु उनमे उत्साह की कमी नज़र आ रही है I काँगड़ा क्षेत्र वैसे भी हिमाचल में हर तरह के चुनावों में चुनौती का केंद्र रहा है I यह क्षत्र पंजाब से टूट कर 1966 में हिमाचल से जुड़ा  था I कांग्रेस को हर लोक सभा चुनाव में इसी क्षत्र पर सर्वाधिक तवाजो देनी पड़ती है I

15 विधानसभा को मिला कर बनाये गए काँगड़ा संसदीय क्षेत में गत चुनावो के विजेता तत्कालीन भाजपा नेता डॉ राजन शुशांत के आप पार्टी की ओर से चुनाव में कूदने से काँगड़ा  चुनाव में इस बार तिकोने मुकाबले के आसार नज़र आ रहे है I हालांकि पूर्व  इतिहास को देखा जाये तो  कांग्रेस और भाजपा यहाँ से समान रूप से जीतते रहे है I पिचले 11 चुनावों पर नज़र डाली जाये तो कांग्रेस 6 बार यहाँ से विजयी हुई है I और एक बात भी तय है की भाजपा और कांग्रेस ने यहाँ से किसी एनी दल सम्मानजनक मत भी हासिल न होने दिए I कांगड़ा अब 15 विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों का संसदीय क्षेत्र है और जनसंख्या के मामले में सबसे बड़ा जिला भी हैI

आगामी चुनाव में कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से  तीन पूर्व सांसद आमने सामने है I इनमे से सबसे अधिक ताज़ुर्वेकार भाजपा के उम्मीदवार शांता कुमार है I वह 1991 में हिमाचल के पहले गैर कांग्रेसी मुख्यमंत्री बने थे I शांता दो बार परदेश के  मुख्यमंत्री बने लेकिन उनकी सरकार हमेशा गिरा दी गई I मुख्यमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान शांता कुमार ने क्षेत्र में बुनियादी सुविधाएं प्रदान की है I निचले क्षेत्रों में पेयजल उपलब्ध कराने के लिएवह कांगड़ा में ‘पानीवाला  मुख्यमंत्री के रूप में भी मशहूर हुई I 1966 पंजाब के पहाड़ी  क्षेत्रों को हिमाचल में शामिल किया गया जिन्हें निचले क्षेत्र कहा गया I प्रदेश में अधिकतर पंजाबी क्षेत्रो से आये भाजपा नेताओं की राजनीती अदिक्त्र निचले क्षेत्रो के आसपास ही घूमती रही है I भाजपा नेता निचले क्षेत्रों की अनदेखी की कांग्रेस नेताओं का आरोप लगाने की ही राजनीती करते रहे ,इन  क्षेत्रों में कांगड़ा ऊना ,हमीरपुर और सोलन जिलों को शामिल किया गया था I भाजपा इन  निचले क्षेत्रों में बेहतरीन प्रदर्शन से ही हमेशा  सत्ता में आया था I और इस क्षेत्र के महत्त्व को देखत हुए पीके धूमल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने 2007 में धर्मशाला में शपथ ली थी I

 

उधर हिमाचल की  वीरभद्र सिंह नेत्रित्व वाली कांग्रेस सरकारों ने ऊपरी क्षत्र से भरी समर्थन मिलने के बावजूद भी काँगड़ा को नज़र अंदाज़ न करते हुए इसे दूसरी आघोषित राजधानी का दर्ज़ा दिया तथा यहाँ दूसरी विधान सभा का निर्माण भी किया I कांगड़ा जिले के लिए कई बड़ी परियोजनाओं को  लाने में भी कांग्रेस सरकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही I वीर भद्र सिंह ने ही निचले क्षेत्रों में मुख्यमंत्री के शीतकालीन प्रवास के आयोजन की प्रथा शुरू की थी ,जिसे अन्य  सरकारों को भी निभाना पड़ा I

पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस ने काँगड़ा संसदीय क्षेत्र की  15 विधानसभा सीटों में से 10 में जीत दर्ज कर कांगड़ा जिला में अच्छा प्रदर्शन किया था I यहाँ से दो सीटों पर निर्दलीय ने भी  जीत दर्ज की थी  जबकि भाजपा सिर्फ तीन विधानसभा क्षेत्रों जीतमें ही जीत पाया था I इस बार मोदी लहर के बावजूद कांग्रेसियों को काँगड़ा सीट जितने की भारी उम्मीद है जो राहुल गाँधी की वीरवार की रैली के बाद पकी होने की सतापक्ष को उम्मीद है I.

आप पार्टी दिल्ली के चुनावों के बाद जनता में एक अलग जगह बना चुकी है I काँगड़ा से भाजपा के मोजुदा सांसद डॉ राजन शुशांत ने गत चार वर्ष अपनी ही प्प्र्देश सरकार के मुख्मंत्री पर कईआरोप कसे जिससे वह यहाँ की जनता में लोकप्रीय हो गए I अब शुशांत द्वारा आप पार्टी में जा कर काँगड़ा से चुनाव लड़ने के फैसले से पहली बार काँगड़ा संसदीय क्षेत्र में तिकोना चुनाव होने की उम्मीद जगी है I जनता के पास दो पुरानी राष्ट्रिय पार्टियों के अलावा एक अन्य विकल्प भी उभरा है I

 

संयुक्त पंजाब में कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से पहली बार चुनाव 1962 में हुए जिसमे कांग्रेस के हेम राज सूद ने जीती Iवह फिर से 1967 में हिमाचल के गठन के बाद भी इस सीट से जीते I 1971 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के विक्रम चंद महाजन कांगड़ा से जीते I . कांगड़ा संसदीय क्षेत्र से आपातकाल के बाद 1977 में पहली बार के लिए एक गैर कांग्रेसी पार्टी उम्मीदवार भारतीय लोक दल के दुर्गा चंद जीते I विक्रम चंद महाजन भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आई) के उम्मीदवार के रूप 1980 में फिर से काँगड़ा से जीते I1984 मेंचंद्रेश कुमारी कांगड़ा से कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में जीत कर दिल्ली गयीं I.

भाजपा ने 1989 में पहली बार कांगड़ा से जीता जब शांता कुमार यहाँ से विजयी हुई I . 1991 मेंभाजपा के  डीडी कन्दूरिया कांगड़ा से जीते I

1996 में कांग्रेस ने फिर से जीत हासिल की और उनके प्रत्याशी  सत महाजन कांगड़ा से शांता कुमार को पराजित कर जीत गए I 1998 में,शांता कुमार कांगड़ा से जीते और केंद्रीय खाद्य मंत्री , अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली राजग सरकार में बने I 2004 मेंहालांकिकांग्रेस के चंदर कुमार शांता कुमार को पराजित किया परन्तु  2009 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के राजन सुशांत ने कांग्रेस के उसी चंदर कुमार को हराया I

 

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