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कहीं भारी न पड़ जाए जरा सी चूक

मंडी, मंडी जिला के बडे़ संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी अब सवाल उठने शुरू हो गए हैं। ईएसआईसी के मेडिकल कॉलेज की दीवारों पर पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लिखने और हिंदोस्तानियों को दी गालियों के बाद अब शक की सूई बाहर से आ रहे आपराधिक किस्म के प्रवासी मजदूरों की तरफ घूमना शुरू हो गई है। मंडी जिला में इस समय ईएसआईसी मेडिकल कॉलेज, आईआईटी कमांद, फोरलेन और विद्युत परियोजनाओं में बडे़ स्तर पर प्रवासी मजदूर काम कर रहे हैं। हैरत की बात तो यह है कि इन प्रवासी मजदूरों की पुलिस के माध्यम से निर्माण कार्य में लगी एजेंसियां पूरी वेरीफिकेशन भी नहीं करवा रही हैं। इसका ताजा उदाहरण नगर परिषद मंडी में देखने को मिलता है। नगर परिषद के डोर-टू-डोर गारबेज कलेक्शन योजना में पश्चिम बंगाल से आए मजदूरों की पते फर्जी निकले हैं। वहीं ऐसे में किसी दिन हिमाचल की शांत वादियों में दूसरे राज्यों से आए आपराधिक प्रवृत्ति के प्रवासी मजदूर बड़ी घटना को अंजाम देने के बाद आसानी से गायब हो सकते हैं। यही नहीं, इन निर्माण परियोजनाओं के लिए बाहर से आनी वाली स्किल लेबर का खासकर निर्माण एजेंसियां पुलिस के पास पंजीकरण नहीं करवा पा रही हैं।

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