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इस साल अब तक एचआरटीसी के 32 एक्सीडेंट

शिमला —  प्रदेश में दुर्घटनाओं का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है। दुर्घटनाआें के कारणों की जांच के बाद जो कुछ सामने आया, उसमें अब तक सुधार नहीं हो सका है। पहाड़ की सड़कों को बड़ा दोषी मानते हुए पथ परिवहन निगम अपना पल्ला झाड़ रहा है और सरकार केंद्र की तरफ टकटकी लगाए बैठी है, क्योंकि जब तक केंद्र सरकार भरपूर पैसा नहीं देती तब तक यहां सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए कुछ नहीं किया जा सकता। ऐसे में हादसे होते रहेंगे और प्रदेश सरकार लकीर ही पीटती रहेगी। इस साल हुए हादसों की बात करें तो 16 जनवरी, 2014 से 24 अगस्त, 2014 तक प्रदेश में 1421 दुर्घटनाएं हो चुकी हैं और यह सिलसिला थम नहीं रहा है। हाल ही में किन्नौर में बस हादसा हुआ, वहीं चंडीगढ़ में पथ परिवहन निगम की वोल्वो बस दुर्घटनाग्रस्त हो गई। कुल हादसों में 590 लोगों की मृत्यु हो गई व 2583 लोग घायल हुए हैं। बड़ी बात यह है कि इन सभी हादसों में एचआरटीसी की 32 बसें दुर्घटनाग्रस्त हुई हैं, वे भी तब जबकि सरकार परिवहन निगम को अधिक सुरक्षित यातायात का साधन बताती है। परिवहन मंत्री द्वारा बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, बावजूद इसके सरकारी बसों की दुर्र्घटनाओं का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। चंडीगढ़ में वोल्वो बस दुर्घटना ताजा उदाहरण है। परिवहन महकमे ने शिमला में सड़क सुरक्षा को लेकर दो दफा बड़े सेमिनार का आयोजन किया, लेकिन उनका फायदा भी कहीं नजर नहीं आ रहा है। माना जाता है कि ऐसे सेमिनार बड़े अधिकारियों तक की सीमित हो गए हैं, क्योंकि फील्ड में काम करने वालों को इससे कुछ नहीं सिखाया जा रहा। हादसों में बनने वाली रिपोर्ट कागजों तक ही सिमट गई है। अलग-अलग कारण सामने आते हैं, लेकिन निगम किसी भी हादसे में अपनी गलती स्वीकार नहीं करता। ऐसे में इन हादसों पर कैसे लगाम कसेगी यह ज्वलंत सवाल खड़ा है।

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