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आवारा पशुओं से मुक्ति दिलाएं जेई-एसई

bbशिमला — हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट की तरफ से अक्तूबर, 2014 में दिए गए निर्देश के बावजूद प्रदेश की सभी सड़कें अब भी आवारा पशुओं से मुक्त नहीं हो पाई हैं। हाई कोर्ट ने प्रदेश सरकार को दिए अपने आदेश में सभी सड़कों को 31 दिसंबर, 2014 तक आवारा पशुओं से मुक्त करने को कहा था। कोर्ट ने अपने इन आदेशों की अनुपालना न होने के कारण सड़कों को आवारा पशु मुक्त करने का दायित्व संबंधित सड़कों के जेई व एसई को सौंपा है। कोर्ट ने अपने आदेशों में स्पष्ट किया है कि यदि किसी अधिकारी के क्षेत्राधिकार में पड़ने वाली सड़कों पर एक से अधिक बार जानवर आवारा घूमते हुए पाए गए तो उक्त संबंधित अधिकारियों को चेताया जाएगा और यदि तीन से अधिक बार ऐसा पाया जाता है तो संबंधित अधिकारियों को सैनश्योर का सामना करना पड़ेगा। फिर भी यह सिलसिला नहीं रुका तो संबंधित अधिकारियों को निलंबित माना जाएगा। कोर्ट ने शहरी क्षेत्रों में गौसदन व गौशाला निर्माण के लिए जरूरी वित्तीय सहायता देने के लिए केंद्र सरकार को भी आदेश दिए हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में इनका निर्माण मनरेगा के तहत करने के आदेश दिए हैं। ये आदेश न्यायाधीश राजीव शर्मा व न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने भारतीय गौवंश रक्षण संवर्धन परिषद हिमाचल प्रदेश की ओर से दायर याचिका की सुनवाई के पश्चात दिए। कोर्ट ने पशु पालन विभाग के उन प्रयासों की सराहना की, जिसके तहत विभाग ने लावारिस घायल पशुओं का उपचार किया तथा पशुओं पर टैटू लगाने संबंधी सराहनीय कार्य किया है।

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