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आधुनिक तकनीक से पुष्प व सब्जी उत्पादन की खेती करने की जानकारी के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया

बागवानी तकनीकी मिशन के अन्तर्गत उद्यान विभाग बिलासपुर द्वारा ब्रहमपुखर स्थित विनायकघाट में बागवानों को आधुनिक तकनीक से पुष्प व सब्जी उत्पादन की खेती करने की जानकारी के लिए दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें आसपास के क्षेत्रों के किसान-बागवानों ने बढ़चढ़कर भाग लिया। समापन समारोह में उद्यान विभाग के उप-निदेशक श्री शशी शर्मा ने कहा कि इन शिविरों के माध्यम से किसानों-बागवानों को वैज्ञानिक तरीके से पुष्प तथा औषधियों के उत्पादन के लिए आधुनिक तकनीकों की जानकारी उपलब्ध करवाई जाती है । उन्होंने कहा कि शिविर में विभिन्न क्षेत्रों से आने वाले किसान-बागवानो को आपस में अपने अनुभव सांझा करने का मौका भी मिलता है । उन्होंने कहा कि बागवानो को अपनी आर्थिकी सुधारने के लिए पुष्प एवं औषधीय पौधों का अधिक से अधिक उत्पादन करना चाहिए । उन्होंने कहा कि विभाग के इस दिशा में किए जा रहे प्रयास तब तक सफल नहीं होते जब तक बागवानों का सहयोग न हो । उन्होंने कहा कि सही फल व सब्जी उत्पादन के लिए नियमित सिंचाई की आवष्यकता होती है और हिमाचल प्रदेश के समशीतोषण भागों में जहां पर गर्मियों में वर्षा कम होती है और जहां सिंचाई की सुविधा उपलब्ध हो उन क्षेत्रों में इसकी खेती की जा सकती है उन्होंने कहा कि आज किसानों बागवानों की सुविधा के लिए विभाग द्वारा भी समय-समय पर अनेकों जानकारियां शिविरों के माध्यम से दी जाती है ताकि किसान-बागवान सही फल उत्पादन कर अपनी आर्थिकी को सुदृृढ़ कर सके । उन्होंने किसान‘-बागवानों से आग्रह किया कि किसी भी समस्या की जानकारी हासिल करने के लिए नौणी विश्वविद्यालय द्वारा मुफत फोन सेवा न0-1551 शुरू की है जिसके तहत किसानों बागवानों को विशेषज्ञों द्वारा उनकी समस्याओं का तत्काल समाधान दुरभाष के माध्यम से किया जाता है ।
इस अवसर पर डा0 पूजा शर्मा ने गलैडीनैंस तथा लीलियम पुष्प उत्पादन, इन में लगने वाली बिमारियों तथा मार्किटिंग के बारे में विस्तार से जानकारी दी । उन्होंने कहा कि गलैडीनैंस पुष्प की पैदावार ग्रीन हाउस से बाहर खेतों में भी जा सकती है क्योंकि इस की पैदावार खेतों में अधिक होती है यही कारण है कि इस पुष्प की पैदावार प्रदेश में सबसे अधिक होती है । उन्होंने कहा कि गलैडीनैंस का पौधा खेतो में फरवरी के अन्त में लगाने का सही समय है और मई व जून में यह तैयार हो जाता है उस समय अन्य राज्यों में फूलों की पैदावर न होने के कारण आॅफ सीजन होने के कारण बागवानों को अच्छे दाम प्राप्त होते है। उन्होंने जिला बिलासपुर का बातावरण भी गलैडीनेंैस पुष्प की पैदावार के लिए सही बताया और शिविर में उपस्थित बागवानों को गलैडीनेंस पुष्प की खेती करने का आग्रह किया ।
शिविर में नौणी विश्वविद्यालय से आए वरिष्ठ वैज्ञानिक डा0 सीता राम धीमान ने कारनेशन तथा गुलदाउदी फुलों के उत्पादन के समय बिमारियों तथा मार्किटिंग की जानकारी दी । उन्होंनें कहा कि बिलासपुर में फलोरीकल्चर की अपार सम्भावनाऐं है और किसी भी प्रकार के फूलों की पैदावार के लिए पानी की उपलब्धता, धूप और समय की अतयन्त आवष्यकता होती है । उन्होंनें कहा कि स्वस्थ फूल पैदा करना बागवानों का प्रथम कत्वर्य होना चाहिए लेकिन बागवान अधूरी जानकारी होने के कारण पुष्प की खेती तो कर लेते है लेकिन बाद में फूलों में अनेक प्रकार की बिमारियां लग जाती है जिस कारण बागवानों को नुकसान हो जाता है इसलिए बागवानों को समय-समय पर बिभाग द्वारा आधूनिक तकनीक से फूलों की खेती करने तथा फूलों में लगने वाली अनेक बिमारियों की जानकारी दी जाती है । उन्होनें कहा कि जिला बिलासपुर के कुछ क्षेत्रों को छोड़कर कारनेशन पुष्प उत्पादन के लिए वातावरण अनुकूल नहीं ह,ै जिस कारण उन्होंने जिला के बागवानों को गुलदाउदी प्रजाती के पुष्प की खेती करने पर जोर दिया और कहा कि गुलदाउदी पुष्प के पौधों को ग्रीन हाउसों के बाहर खुले खेतों में भी लगाया जा सकता है और इस फूल की बिलासपुर क्षेत्र में बातावरण अनुकूल होने के कारण अधिक पैदावार हो सकती है।
इस अवसर पर उप निदेशक बागवानी श्री शशी शर्मा ने शिविर में उपस्थित 420 बागवानों को प्याज के बीज भी वितरित किया । इस अवसर पर एस.एम.एस जिला बागवानी डा0 विनोद शर्मा, एस.एम.एस सदर डा0 राम लाल शर्मा, एच.डी.ओ. सदर डा0 अमित शर्मा, विभिन्न विभागों के अधिकारी, आसपास की पंचायतों से आए पंचायत प्रतिनिधि तथा अन्य गणमान्य लोग भी उपस्थित थे ।

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