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आखिर कब पूरी होगी वन रैंक वन पैंशन की मांग:धर्मेंद्र पटियाल

आखिर वन रैंक वन पैंशन की मांग कब पूरी होगी। केंद्र सरकार अब तक सैनिकों को केवल बरगला रही है। 17 फरवरी 2014 को कोसियारी कमेटी की रिकमेंडेशन के तहत इस मांग को माना गया है। अब केंद्र सरकार सैनिकों के साथ धोखा करती दिख रही है। सितंबर 2013 में रिवाड़ी में जनसभा को संबोधित करते हुए वर्तमान पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा था कि उनकी सरकार बनते ही इसे लागू किया जाएगा। इसके बाद उन्होंने दो माह पूर्व सियाचिन के दौरे पर भी यही कहा है। हैरानी तो यह है कि रक्षा मंत्री ने यह कहा कि 80 प्रतिशत वन रैंक वन पैंशन को लागू कर दिया जाएगा। इसके अलावा उनके एक अन्य ब्यान ने सैनिकों के हौसलों को तोड़ने का काम किया है, जिसमें डनहोंने कहा है कि सौ प्रतिशत संतुष्टि किसी को कहीं भी नहीं मिलती है। शायद रक्षा मंत्री यह नहीं जानते है कि जो सैनिक अपनी जिंदगी की परवाह किए बिना हर पल देश पर कुर्बान होने के लिए तैयार रहता है, वो यह कभी भी नहीं सोचता है कि वे अपना कार्य 80 प्रतिशत क्षमता का ही करेगें। सेना में 85 प्रतिशत सैनिक 40 वर्ष और सैन्य अधिकारी 54 वर्ष की आयु में ही सेवा निवृत हो जाते है। आज स्थिति यह हो गई है कि सैनिकों को किसी लालच के लिए नहीं बल्कि अपने मान सम्मान के लिए मांगने पड़ रहा है। केंद्र इनके साथ न केवल धोखा कर रही है बल्कि बरगला भी रही है। यदि शीघ्र इस मांग को पूरा नहीं किया गया तो पगदेश के भूतपूर्व सैनिक सड़कों पर उतरने से परहेज नहीं करेंगें। हैरानी तो यह है कि प्रदेश से चार-चार एमपी केंद्र सरकार में है और हिमाचल में ज्यादा सैनिक होने के चलते वे भी उनके हक की लड़ाई को लड़ने में अक्षम दिख रहे है।

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