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आईटीआई नैहरनपुक्खर ने जमाई देश में अपनी धाक

IMG_20140527_144216_1 (1)कांगड़ा जि़ला के नैहरनपुक्खर स्थित राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) ने हाल ही में भारतीय उद्योग संघ (सीआईआई) द्वारा २५ उत्कृष्ट औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों के चयन के लिए करवाए गए राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण में देश भर में १०वें स्थान पर रह कर अपनी धाक जमाई है। भारत सरकार द्वारा लिए गए एक निर्णय के अन्तर्गत आरम्भ की जाने वाली योजना में उद्योगों की मांग के अनुसार श्रमिकों को प्रशिक्षित करने का निर्णय लिया गया है। चिन्हित उत्कृष्ट संस्थानों को योजना अपने क्षेत्र में इन उद्योगों की मांग के मद्देनज़र उन संभावनाओं का पता लगाने का दायित्व सौंपा गया है कि वे अपने वर्तमान पारम्परिक प्रशिक्षिण सुविधाओं के तहत उनकी आवश्यक्ता की पूर्ति कर सकते हैं या उन्हें कुछ नया करने की ज़रूरत है। इन संस्थानों को औद्योगिक नियोक्ताओं की आवश्यक्ता के अनुसार संभावनाओं का पता लगा कर श्रमिकों को प्रशिक्षण प्रदान के निर्देश दिये गये हैं। आईटीआई, नैहरनपुक्खर के आकलन के अनुसार उद्योगों, विशेषकर लघु एवं मझोले औद्योगिक संस्थान ऐसा प्रशिक्षण कार्यक्रम चाहते हैं, जिनमें दो या दो से अधिक टे्रड शामिल हों। ऊना जि़ला की एक औद्योगिक इकाई ने अपनी आवश्क्ताओं के अनुसार ऐसा संभव होने की स्थिति में ८० प्रतिशत से अधिक प्रशिक्षुओं को भर्ती करने पर अपनी सहमति जताई है। आईटीआई, नैहरनपुक्खर ने केन्द्रीय श्रम एवं रोज़गार मंत्रालय के रोज़गार एवं प्रशिक्षण निदेशालय (डीजीईटी) को संभावित पाठ्यक्रम और प्रशिक्षण का खाका स्वीकृति के लिए भेजा है। इस आशय की स्वीकृति के पश्चात् इन टे्रडों में प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्तियों को एनसीवीटी अर्थ रास्ट्रीय  व्यावसायिक प्रशिक्षण परिषद् के नियमों के अन्तर्गत प्रमाण-पत्र प्रदान किए जा सकेंगे। वर्ष २०१३-१४ में सीआईआई, जिसने देश भर की १,३९६ आईटीआई में से १,००० को उद्योग सहभागी प्रदान किए थे, ने पीपीपी क्रम के प्रबंधन के अन्तर्गत प्रगति का जायजा लेने के लिए एक सर्वेक्षण करवाया। सीआईआई ने आईटीआई, नैहरनपुक्खर के अध्यक्ष को भी इस टीम में स्थान प्रदान किया। पहले चरण के तहत सभी आईटीआई द्वारा डीजीईटी को प्रेषित त्रैमासिक रिपोर्ट के आधार पर, इनमें से १०० संस्थानों को प्रगतिशील आईटीआई की श्रेणी में रखा गया। इसके बाद सभी १०० आईटीआई का विस्तृत सर्वेक्षण करवाया गया। आईटीआई, नैहरनपुक्खर की आईएमसी के अध्यक्ष प्रो० भोला नाथ कश्यप बताते हैं कि यह हिमाचल का एक मात्र ऐसा संस्थान है, जिसे उद्योगों की मांग के अनुसार प्रशिक्षण प्रदान करने का दायित्व सौंपा गया है। डीजीईटी ने देश के चुनिंदा १,३९६ आईटीआई को सीधे उसके खाते में दस वर्षों की अवधि तक ब्याजमुक्त २.५ करोड़ रुपये हस्तांतरित किए, जो निर्धारित अवधि के बाद १५ बराबर किश्तों में वापिस किए जाने प्रस्तावित हैं। इस हस्तांतरित राशि का प्रबंधन, संस्थान प्रबंधन समिति (आईएमसी) नामक उस सभा द्वारा किया जा रहा है, जो उद्योग सहभागी के सहयोग से गठित है। इसमें चार अन्य उद्योग सदस्य और पांच सरकारी सदस्य हैं। सम्बन्धित आईटीआई के प्राचार्य आईएमसी के सदस्य सचिव हैं। उद्योग सहभागी आईएमसी के अध्यक्ष मनोनीत किए जाते हैं। ऊना जि़ला के मैहतपुर की डेटलाईन पब्लिकेशन्स के प्रो० बी०एन० कश्यप वर्ष २००८ से आईटीआई, नैहरनपुक्खर की आईएमसी के अध्यक्ष हैं। अपना कार्यभार संभालने के बाद प्रो० कश्यप ने कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए, जिनमें आईटीआई में कई अप्रासंगिक टे्रड बंद किया जाना, बाज़ार की मांग के अनुसार रैफ्रिजरेशन एवं एअर कंडीशनिंग, कम्पयूटर ऑपरेटर्स, ड्राफ्ट्समैन, प्लम्बर जैसे नए टे्रड आरम्भ करना, सभी टे्रडों के लिए आधुनिक तकनीकी पर आधारित मशीन उपलब्ध करवाना, कार्यालय का आधुनिकी एवं कम्पयुट्रीकरण, वर्तमान में सभी दस टे्रडों में दो इकाइयों की स्थापना, आईएमसी द्वारा नए टे्रडों के लिए स्टाफ की नियुक्ति एवं सभी को वार्षिक वेतन वृद्धि के आधार पर वेतन भुगतान, प्रशिक्षुओं को कैम्पस साक्षात्कार के अनुसार नौकरी प्रदान करवाने के लिए प्लेसमैंट सेल की स्थापना, परिसर में विशाल परीक्षा हॉल सहित तीन मंजिले भवन की स्थापना तथा अगले साल ऐसा पुस्तकालय स्थापित करने की योजना है, जिसमें तकनीकी ज्ञान तथा सामान्य विषयों पर आधारित पुस्तकों को शामिल किया जाएगा। संस्थान के प्राचार्य कुलदीप सिंह बताते हैं कि इन सभी प्रयत्नों के फलस्वरूप आईटीआई का वार्षिक परिणाम शत-प्रतिशत रहता है और प्रशिक्षुओं की नियुक्ति दर ९० प्रतिशत तक है।

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