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आईजीएमसी में ट्रॉमा सेंटर नामंजूर

19d1-8-300x181शिमला –  केंद्र ने आईजीएमसी के ट्रॉमा सेंटर को नामंजूर कर दिया है। पिछले वर्ष अगस्त में केंद्र से निरीक्षण के लिए आई टीम ने आधारभूत ढांचा और स्टाफ की कमी को लेकर कई आपत्तियां लगाई थीं। हैरत की बात है कि वर्ष 2006 में केंद्र ने ट्रॉमा सेंटर के लिए मंजूरी दी थी, बावजूद इसके प्रदेश सरकार आईजीएमसी में ट्रॉमा सेंटर के लिए कोई उचित कदम नहीं उठा सकी। ऐसे में केंद्र की टीम ने अब आईजीएमसी का ट्रॉमा सेंटर नामंजूर कर दिया है, जिससे प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाएं फिर सवालों के कटघरे में हैं। ट्रॉमा सेंटर का मसला अभी तक प्रदेश सरकार सुलझा नहीं पाई है, जिससे यह मामला अब कोर्ट के अधीन है। हैरान कर देने वाली बात यह है कि नौ सालों में भी आईजीएमसी का ट्रॉमा सेंटर सरकार तैयार नहीं कर पाई। अगस्त माह में भले ही केंद्र सरकार की टीम आईजीएमसी में निरीक्षण के लिए आई थी, लेकिन उस वक्त भी टीम ने कई आपत्तियां लगाई थीं। मेडिकल नार्म्स के मुताबिक देखा जाए तो ट्रॉमा सेंटर के लिए पांच ओटी, विशेषज्ञ डाक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ, ब्लड बैंक और वार्ड अनिवार्य होता है, मगर आईजीएमसी प्रशासन के पास जगह की कमी के कारण ट्रॉमा सेंटर तैयार करने में दिक्कतें आ रही थीं। इसी कारण केंद्र की टीम ने जगह और स्पेशलिस्ट डाक्टरों की कमी को देखते हुए दोबारा आपत्तियां लगाई हैं। गौरतलब है कि कुल्लू, बिलासपुर और आईजीएमसी के लिए 2006 में केंद्र सरकार ने ट्रॉमा सेंटर की मंजूरी दी थी। इसके लिए राशि भी स्वीकृत की थी। इसमें कुल्लू और बिलासपुर का ट्रॉमा सेंटर तैयार हो गया है, लेकिन राज्य स्तरीय अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर अब भी विवाद में है।

बिलासपुर-कुल्लू में कम स्टाफ

बिलासपुर और कुल्लू में चल रहे ट्रॉमा सेंटर में स्टाफ की कमी है, जिससे मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए भटकना पड़ रहा है। सरकार ने भले ही ट्रॉमा सेंटर तैयार कर दिए हैं, लेकिन स्पेशलिस्ट की कमी के कारण मरीजों को बाहरी राज्यों के लिए रैफर किया जाता है।

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