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आंगनबाडी वरकर्ज एंड हेल्पर्ज यूनियन का नौंवा जिला सम्मेलन रविवार को विश्वकर्मा मंदिर हॉल मंडी में संपन्न

मंडी, 8 सितम्बर (पुंछी): आंगनबाडी वरकर्ज एंड हेल्पर्ज यूनियन (सबंधित सीटू) का नौंवा जिला सम्मेलन रविवार को विश्वकर्मा मंदिर हॉल मंडी में आयोजित किया गया। जिसका उदघाटन आंगनबाडी यूनियन की राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष और राज्य महासचिव सरोज शर्मा ने किया। जिला प्रधान सुमित्रा ठाकुर, सचिव राजकुमारी, कोषाध्यक्ष हिमेन्द्री शर्मा के अलावा सीटू के राज्य उपाध्यक्ष व जिला प्रधान भूपेन्द्र सिंह और महासचिव राजेश शर्मा ने भी सम्मेलन में अपने विचार रखें। सबसे पहले सम्मेलन में शोक प्रस्ताव रखा गया जिसमें सीटू के नेताओं की मृत्यु और यूनियन की राज्य प्रधान इंदिरा ठाकुर के पति की स्क्रब टाईफस से 30 अगस्त को हुई आकस्मिक मृत्यु पर सम्मेलन में दो मिनट का मौन रखा गया। इसके बाद सम्मेलन का उदघाटन करते हुये सरोज शर्मा ने बताया कि आज केन्द्र व राज्य की सरकारें मजदूर विरोधी नीतियां लागू कर रही हैं। श्रम कानूनों का उल्लघंन कर रही हैं मजदूरों को मिलने वाली सामाजिक सुविधाओं में कटौती कर रही हैं। मंहगाई निरंतर ब$ढ रही हैं और आंगनबा$डी कार्यकर्ताओं का सरकारें पिछले 38 वर्षो से कम मानदेय देकर शोषण कर रही हैं। जिसके खिलाफ फरवरी में पूरे देश के मजदूरों ने ऐतिहासिक दो दिन की हडताल की थी और अब 25 सितंबर को सभी जिला मुख्यालयों व शिमला में प्रदर्शन किया जायेगा तथा 12 दिसंबर को संसद घेराव किया जायेगा ताकि सरकारें अपनी मजदूर विरोधी नीतियों को बदले। सीटू के राज्य उपाध्यक्ष भूपेन्द्र सिंह ने कहा कि यह ब$डे खेद व शर्म की बात है कि एक तरफ कांग्रेस और भाजपा की सरकारें महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की ब$डी-ब$डी बातें करती हैं। परन्तु हकीकत में महिलाओं को न्यूनतम वेतन भी नहीं देती हैं। आंगनबा$डी में कार्यरत ३६ हजार महिला कार्यकर्ताओं को अभी भी 110/- रूपये दिहाडी दी जा रही हैं जबकि इस कार्यक्रम को चले 38 वर्ष हो चुके हैं। विभाग के सभी कर्मचारी रेगूलर हैं परन्तु असली कार्य करने वाली, कार्यकर्ता और सहायिकाओं को सरकार कर्मचारी मानने से भी इंकार करती हैं। हिमाचल प्रदेश सरकार इन कायकर्ताओं से दसियों सर्वेक्षण व अन्य कार्य करवाती हैं परन्तु उन्हें राज्य की ओर से एक रूपया भी नहीं दिय जाता हैं। एक तरफ जहां सरकारी कर्मचारियों को पंजाब के बराबर वेतन दिया जाता है वहीं आंगनबा$डी कार्यकर्ताओं को पंजाब के बराबर पांच हजार और तीन हजार मानदेय से भी वंचित रखा गया हैं। जिसके लिए यूनियन ने 27 मई को शिमला में रैली करके सरकार को मांगपत्र सौंपा था परन्तु अभी तक इसकी सुनवाई न होने के चलते अब दोबारा 12 नवम्बर को शिमला में प्रदर्शन किया जायेगा। युनियन की जिला प्रधान सुमित्रा ठाकुर ने सरकार और विभाग की कार्य प्रणाली की क$डी आलोचना करते हुये कहा कि केन्द्रों में दिये जाने वाला आहार जो पहले विभाग क्रय करके देता था अब कार्यकर्ताओं को अपने मानदेय से ही क्रय करने के आदेश दिये हैं जिनका यूनियन विरोध करेगी। एनआरएचएम के बिल पिछले डे$ढ वर्षो से लंबित प$डे है। गैस सिलेंडर के लिए 2400 आहारों की अव्यवहारिक सीमा निर्धारित की है। पोषाआहार सप्ताह, स्तनपान दिवस, जागरूकता और बाल मेलों के आयोजन के लिए मिलने वाली राशि में कटौती की जा रही हैं। केन्द्रों का किराया मात्र 200/- रूपये रखा गया हैं जो पर्याप्त नहीं हैं। यूनियन इन सब समस्याओं को हल करने के लिए सभी प्रोजेक्टों में 25 सितंबर को मांगपत्र देगी और प्रदर्शन करेगी। सम्मेलन में जिला सचिव राजकुमारी ने संगठन की गतिविधियों की रिपोर्ट रखी और अक्तूबर माह तक सभी सर्कलों में यूनियन कमेटियां गठित करने का निर्णय लिया।
55 सदस्यीय जिला कमेटी का गठित
सम्मेलन में 55 सदस्यीय जिला कमेटी का गठन किया गया जिसमें 25 सदस्यीय कार्यकारिणी चुनी गई जिसमें सुमित्रा ठाकुर (सुंदरनगर) को प्रधान, उपप्रधान- छम्मा देवी(गोहर),हिमाचली (रिवालसर), कृष्ण सदर, प्रतिभा-द्रंग,ललित (करसोग), सचिव- राजकुमारी (गोहर), सह सचिव- मजुंला (चौंत$डा),भावना (धर्मपुर ),शीला (गोपालपुर), माया देवी (सुंदरनगर) व कोषाध्यक्ष-हमिन्द्री (सदर) को चुना गया।

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