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’अवैध खनन पर रोक के लिए सरकार ने उठाए ठोस कदम’

शिमला, उद्योग विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि सनेहल व सीर खड्ड में किसी प्रकार का अवैध खनन नहीं हो रहा है और प्रदेश सरकार ने अवैध खनन को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।  उन्होंने कहा कि सनेहल व सीर खड्डों में विभाग द्वारा 5 खनन पट्टे स्वीकृत किए हैं। इन खनन पट्टों में पट्टा धारकों द्वारा पर्यावरण संबंधी मंजूरी प्राप्त होने के उपरान्त ही नियमानुसार खनन कार्य किया जा रहा है। प्रवक्ता ने कहा कि उक्त स्वीकृत खनन पट्टा क्षेत्रों को छोड़कर इन खड्डों में मात्र कुछ क्षेत्र ही खाली हैं और यहां अवैध खनन की रोकथाम के लिए खनन व अन्य संबंधित अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों द्वारा अप्रैल, 2013 से जुलाई, 2014 तक अवैध खनन के 43 मामले पकड़े गए हैं तथा दोषियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्यवाही की जा रही है। इसके अतिरिक्त उपायुक्त जिला हमीरपुर, उपमण्डलाधिकारी भोरंज व खनन अधिकारी हमीरपुर द्वारा भी इन खड्डों में पुलिस के सहयोग से 20 अगस्त, 2014 को निरीक्षण किया गया तथा खड्डों में स्थित खनन पट्टों का सीमांकन करवाया गया है तथा निरीक्षण के दौरान इन क्षेत्रों में किसी भी प्रकार का अवैध खनन नहीं पाया गया है। उन्होंने कहा कि यह खड्डें मंडी, हमीरपुर व बिलासपुर की सीमा पर स्थित हैं, इसलिए विभाग के निर्देशानुसार इन जिलों के खनन अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से भी इन खड्डों का निरीक्षण किया जा रहा है। उन्होंने देवाशीष भट्टाचार्य द्वारा सूचना के अधिकार के अन्तर्गत उपमण्डलाधिकारी, भोरंज की शिकायत बारे की गई कार्यवाही की सूचना प्राप्त करने के संदर्भ में कहा कि उपमण्डलाधिकारी के विरूद्ध छानबीन का मामला निदेशक उद्योग के कार्य क्षेत्र में न होने के कारण यह मामला 10 नवंबर, 2014 को जिला उपायुक्त हमीरपुर को आगामी कार्यवाही हेतु प्रेषित किया जा चुका है। देवाशीष भट्टाचार्य द्वारा उक्त सूचना के अतिरिक्त क्षेत्र में अवैध खनन के बारे में जो सूचना मांगी थी, इस बारे में उद्योग विभाग ने प्रार्थी को 8 दिसंबर, 2014 को पत्र लिखकर सूचित किया था कि मांगी गई जानकारी विभाग द्वारा तैयार कर ली गई है तथा सूचना के अधिकार के अंतर्गत तैयार की गई सूचना का खर्चा जमा करवाया जाए, लेकिन प्रार्थी द्वारा यह खर्च अभी तक जमा नहीं करवाया गया है। इसलिए नियमानुसार उक्त सूचना प्रार्थी को नहीं भेजी जा सकी। उन्होंने कहा कि इस मामले के बारे में विस्तृत रिपोर्ट निदेशक उद्योग द्वारा 26 दिसंबर, 2014 को मुख्यमंत्री के कार्यालय को प्रेषित की जा चुकी है।

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