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अब आपको मिलेगा पावरफुल लोकायुक्त

शिमला. हिमाचल के लोगों को अब पावरफुल लोकायुक्त मिलेगा। सरकार ने हिमाचल प्रदेश लोकायुक्त बिल 2012 का ड्राफ्ट तैयार कर लिया है।

नए ड्राफ्ट में लोकायुक्त को सू-मोटो का अधिकार दिया गया है। जो कि 1983 के लोकायुक्त एक्ट में नहीं थी। लोकायुक्त किसी भी लोक सेवक, अधिकारी और कर्मचारी के खिलाफ शिकायत मिलने पर जांच कर सकता है।

सू-मोटो का प्रावधान
नए प्रस्तावित एक्ट में यह भी प्रावधान किया गया है कि किसी न्यूज आइटम पर सू-मोटो लिया जा सकता है। जांच के बाद अब चालान सरकार को भेजने की भी आवश्यकता नहीं है। नए एक्ट में पुलिस के कुछ जांच अधिकारी सौंपे जाने का प्रावधान किया गया। जिसमें जांच सिर्फ डीएसपी रैंक तक का अफसर करेगा। लोकायुक्त के पास अब एक प्रॉसीक्यूशन विंग भी होगा। जो कि विशेष अदालतों में भ्रष्टाचार संबंधी मामलों का ट्रायल करवाएगा। लोकायुक्त का कार्यकाल पांच साल का रखा गया है। हिमाचल लोकायुक्त बिल-2012 और उत्तराखंड लोकायुक्त बिल 2011 में कई समानताएं हैं।

भ्रष्टाचार पर नकेल
मुख्यमंत्री, मंत्री, मुख्य संसदीय सचिव, संसदीय सचिवों, विधायकों, राज्य सरकार के आला अधिकारियों की भ्रष्टाचार से जुड़ी शिकायतों की जांच करेगा।

कमेटी की सिफारिश
लोकायुक्त की नियुक्ति सलेक्शन कमेटी की सिफारिश पर राज्यपाल करेगा। तीन सलेक्शन सलेक्शन कमेटी का मुखिया मुख्यमंत्री होंगे। विधानसभा में नेता विपक्ष तथा हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश होंगे। सलेक्शन कमेटी एक सर्च कमेटी बनाएगी जो कि लोकायुक्त के लिए उपयुक्त उम्मीदवार ढूंढेंगी।

सीएम होंगे चेयरमैन
सलेक्शन कमेटी का चेयरमैन मुख्यमंत्री होंगे। नेता प्रतिपक्ष, उत्तराखंड हाईकोर्ट के दो न्यायधीश, लोकायुक्त का पूर्व वरिष्ठ चेयरपर्सन। इसके अलावा सलेक्शन कमेटी दो और सदस्यों को रखेगी। इसमें सुप्रीम कोर्ट से सेवानिवृत्त न्यायधीश और रिटायर्ड आर्मी, नेवी और एयरफोर्स के चीफ के अलावा रिटायर्ड चीफ इलेक्शन कमिश्नर को रखा जा सकता है। कमेटी लोकायुक्त के चेयरपर्सन का चयन करेगी, जबकि सर्च कमेटी 5 सदस्यों का चयन।

लोकायुक्त इनकी कर सकेगा जांच

:मुख्यमंत्री, मंत्री, मुख्य संसदीय सचिव और संसदीय सचिव
: विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और विधायक
: राज्य सरकार के अधिकारी एवं कर्मचारी
: केंद्र सरकार के कर्मियों के खिलाफ प्रारंभिक जांच
: निगम-बोर्डो के चेयरमैन, वायस चेयरमैन, मैनेजिंग डायरेक्टर
: मेयर, डिप्टी मेयर, काउंसलर्स, जिला परिषद के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष
: नगर पंचायतों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष एग्जीक्यूटिव ऑफिसर्स और सचिव
: कुलपति, उपकुलपति
: ज्यूडिशियल सर्विस

झूठी शिकायत पर जेल

नए बिल में झूठी शिकायत करने वाले को दंडित करने का प्रावधान भी रखा गया है। लोकायुक्तमंे शिकायत गलत पाए जाने पर शिकायतकर्ता को एक साल की सजा व 1 लाख रुपए तक जुर्माना हो सकता है। पीड़ित अधिकारी, कर्मचारी और जनसेवक को शिकायतकर्ता के खिलाफ स्पेशल कोर्ट में जाना पड़ेगा।

एफिडेविट पर देने होगी शिकायत
प्रस्तावित बिल में लोकायुक्त को कई अधिकार दिए गए हैं। लोकायुक्त गलत ढंग से हासिल की गई लीज, लाइसेंस, ठेके और किसी भी एग्रीमेंट को निरस्त करने की सिफारिश सरकार से कर पाएगा। फर्म, कंपनी, कांट्रेक्टर और भ्रष्टाचार में लिप्त व्यक्ति को ब्लैक लिस्टेड करने को रेकेमंड कर सकता है।

तीन माह में जानकारी
लोकायुक्त की सिफारिश पर क्या कार्रवाई हुई। तीन माह के भीतर उसे यह भी बताना होगा। किन कारणों से कार्रवाई नहीं हुई इसकी रिपोर्ट भी बतानी होगी। लोकायुक्त इन्वेस्टिगेटिंग ऑफिसर्स को समय-समय पर जांच को लेकर सलाह दे सकेगा। भ्रष्टाचार से जुड़े किसी भी मामले में सू-मोटो लेने का अधिकार दिया जाना भी बिल में प्रस्तावित है। भ्रष्टाचारियों की संपत्ति जब्त करने का भी प्रावधान रखा गया है। इसके लिए लोगों को एफिडेविट पर शिकायत देनी होगी।

स्पेशल कोर्ट में ट्रायल
राज्य सरकार भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों के ट्रायल के लिए स्पेशल कोर्ट का गठन करेगी। स्पेशल कोर्ट को भ्रष्टाचार से जुड़े मामले का ट्रायल एक साल के भीतर करना होगा। साल भर के भीतर अगर किसी मामले का ट्रायल पूरा नहीं हो पाता है तो उसे पूरा करने के लिए तीन माह का प्रावधान रखा गया है। दो साल के भीतर किसी भी सूरत में ट्रायल पूरा हो जाना चाहिए।

एक चेयरपर्सन, दो सदस्य
हाईकोर्ट के जजों की जांच का अधिकार नहीं लोकायुक्त हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस और अन्य जजों के खिलाफ जांच नहीं कर सकता है। वह सिर्फ न्यायिक अधिकारियों के खिलाफ आई शिकायतों की जांच कर सकेगा। लोकायुक्त बेंच सिफारिश पर सीएम के खिलाफ जांच लोकायुक्त को मुख्यमंत्री, मंत्रियों, मुख्य संसदीय सचिव, संसदीय सचिव, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव से ऊपरी रैंक और विधायकों के खिलाफ जांच तथा अभियोजन के लिए फुल बैंच की अनुमति लेनी अनिवार्य होगी।

व्हिसल ब्लोअर को मिलेगा संरक्षण
व्हिसल ब्लोअर की सेफ्टी का भी बिल में प्रावधान किया गया है। लोकायुक्त शारीरिक नुकसान या प्रशासनिक प्रताड़ना से बचाने के जरूरी आदेश जारी कर सकेगा। अगर व्हिसल ब्लोअर अपनी पहचान छुपाना चाहे तो उसकी पहचान गुप्त रखी जाएगी। व्हिसल ब्लोअर की शिकायत मिलने के 15 दिन के भीतर उसे सुरक्षा देनी होगी।

एफिडेबिट के साथ बयान के रुप में देनी होगी शिकायत
नए बिल में शिकायतकर्ता को कोई राहत नहीं दी गई है। शिकायतकर्ता बयान के रूप में शिकायत देगा। इसके साथ एफिडेबिट भी देना होगा।

बिल तैयार, चर्चा के लिए सदन में रखेंगे-धूमल
मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल ने कहा कि लोकायुक्त बिल 2012 तैयार है। लोकायुक्त से पूछ कर ही इसे तैयार किया गया है। इसी सत्र में इसे चर्चा के लिए सदन के समक्ष रखा जाएगा।

उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम
मुख्यमंत्री, मंत्री और विधायकों के खिलाफ जांच के लिए फुल बेंच की अनुमति। अधिकारियों के खिलाफ जांच का अधिकार।
भ्रष्टाचार का दोष सिद्ध होने पर 6 माह से 10 साल तक का कठोर कारावास।
रैंक के हिसाब से सजा का ऐलान
भ्रष्टाचार से जुटाई संपत्ति भी होगी जब्त
झूठी शिकायत पाए जाने पर सिर्फ जुर्माने का प्रावधान
भ्रष्टाचार के मामले की जांच 6 माह में पूरी करनी होगी।

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