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अन्तरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेला सम्पन्न

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राज्यपाल उर्मिला सिंह ने कहा कि मेले एवं त्यौहार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के प्रतीक हैं और इनका संरक्षण सुनिश्चित बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्सवों के आयोजन में हमें समृद्ध परम्पराओं की झलक देखने को मिलती है और इससे भाईचारा और एकता भी सुदृढ़ होती है। इनके आयोजन से युवा पीढ़ी को अपनी वैभवशाली संस्कृति की जानकारी मिलती है। राज्यपाल आज मण्डी में सप्ताह भर चले अन्तरराष्ट्रीय शिवरात्रि मेले के समापन समारोह को सम्बोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि हमारे देश के युवा सभी क्षेत्रों में प्रगति कर रहे हैं और युवा पीढ़ी आधुनिक परिप्रेक्ष्य के अनुरूप कार्य करती है, किन्तु आधुनिकता और पुरातन परम्पराओं के मध्य सामजस्य आवश्यक है, क्योंकि यह हमारी विशिष्ट संस्कृति की रीढ़ है। श्रीमती सिंह ने कहा कि देश भर में हिमाचल प्रदेश को भगवान शिव के निवास और समृद्ध देव संस्कृति के लिए जाना जाता है। इसकी झलक हिमाचल प्रदेश में आयोजित किए जाने वाले मेलों, त्यौहारों और उत्सवों में देखने को मिलती है। युवा पीढ़ी को रीति-रिवाजों और परम्पराओं की जानकारी देना आवश्यक है ताकि समृद्ध संस्कृति का संरक्षण सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि युवाओं को इन कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए, ताकि वे परम्पराओं से भलीभांति परिचित हो सकें। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लोग परिश्रमी हैं और स्थानीय देवी-देवता उनके जीवन का अभिन्न अंग हैं तथा इन महोत्सवों के माध्यम से लोगों की धर्म में आस्था प्रकट होती है। उन्होंने महोत्सव में स्थानीय देवी-देवताओं को आमंत्रित करने के लिए शिवरात्रि मेला आयोजन समिति के प्रयासों की सराहना की। श्रीमती सिंह ने इससे पूर्व माधोराय मंदिर में पूजा-अर्चना की और पारम्परिक जलेब में भाग लिया। राज्यपाल ने मेले की विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेतओं को सम्मानित भी किया। उपायुक्त एवं मेला आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री देवेश कुमार ने राज्यपाल का स्वागत किया। मण्डलीय आयुक्त ओंकार शर्मा, प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

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